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सावधान! ट्रेन से सफर कर रहे हैं तो… मीठी चाय और पानी में मिलकर आता है ‘मौत का नशा’, ऐसे यात्रियों को बनाते थे शिकार

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गुना/भोपाल: यदि आप भी ट्रेन से सफर करने के शौकीन हैं और अनजान लोगों द्वारा दी गई चाय या पानी पीने की आदत रखते हैं, तो यह खबर आपके पैरों तले जमीन खिसका देगी। रेलवे ट्रैक पर घूमने वाले कुछ शातिर जहरखुरान अब इतने शातिर हो चुके हैं कि आपकी मीठी बातों से दोस्ती गांठकर चंद मिनटों में आपको गहरी नींद सुला देते हैं और सब कुछ लूटकर फरार हो जाते हैं। गुना जीआरपी पुलिस ने ऐसे ही एक शातिर अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए एक आरोपी को धर दबोचा है।

शादी की सालगिरह का सफर बना खौफनाक सपना

घटना 18 जून की है। भोपाल निवासी नर्मदा प्रसाद अहिरवार अपनी पत्नी के साथ शादी की सालगिरह मनाने के लिए भोपाल से जोधपुर जाने वाली ट्रेन की जनरल बोगी में सवार होकर खाटू श्याम (जयपुर के पास) जा रहे थे। रास्ते में दो शातिर बदमाशों ने दंपती से बड़ी ही आत्मीयता से बातचीत शुरू की। बातों-बातों में ऐसा भरोसा जीता कि दंपती को जरा भी भनक नहीं लगी कि ये लोग किसी बड़े खतरे का संकेत हैं।

बातचीत के दौरान मौका पाकर आरोपियों ने दंपती की पानी की बोतल में जहरीली दवा मिला दी। उस पानी को पीते ही पति-पत्नी कुछ ही मिनटों में बेसुध होकर गहरी बेहोशी में चले गए। जब जयपुर स्टेशन पर जीआरपी ने दोनों को अहोश हालत में अस्पताल पहुंचाया और होश आया, तब तक उनके सारे जेवरात और 9 हजार रुपए नगद गायब हो चुके थे।

गुना जीआरपी और सीसीटीवी फुटेज ने खोला राज

जयपुर जीआरपी ने इस मामले में ‘शून्य पर कायमी’ कर केस डायरी भोपाल जीआरपी को ट्रांसफर की। जब पुलिस ने रेलवे स्टेशनों के सीसीटीवी कैमरे खंगाले, तो एक अहम सुराग मिला—वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों शातिर आरोपी जयपुर से लौटकर सीधे गुना जिले के रुठियाई स्टेशन पर उतरे थे।

मामले की गंभीरता को भांपते हुए स्पेशल डीजी राजबाबू सिंह और एसपी यशपाल सिंह के मार्गदर्शन में पुलिस टीम ने तकनीकी जांच के घोड़े दौड़ाए। पुराने अपराधियों के फोटो का मिलान किया गया और कड़ियां जोड़ते-जोड़ते पुलिस की टीम झारखंड के जामताड़ा तक जा पहुंची, जहां से इस शातिर गिरोह का पर्दाफाश हुआ।

7 राज्यों में फैला है जुर्म का यह जाल

गुना जीआरपी की गिरफ्त में आए आरोपी का नाम दुर्भुज मंडल है, जबकि उसका साथी सुशील मंडल अभी भी पुलिस की पकड़ से दूर फरार चल रहा है। पूछताछ में जो सच सामने आया, वह हैरान करने वाला है:

  • देशभर में फैला नेटवर्क: यह शातिर गिरोह ओडिशा और बिहार सहित देश के 7 अलग-अलग राज्यों में इस तरह की वारदातों को अंजाम दे चुका है।
  • पुराना अपराधी: आरोपी दुर्भुज मंडल इससे पहले पुरी, विजयवाड़ा, धनबाद, रांची, टाटानगर, खड़गपुर और पुणे जैसे बड़े रेलवे स्टेशनों पर भी पकड़ा जा चुका है।
  • गैंग का मुखिया: महज दूसरी कक्षा तक पढ़ा दुर्भुज मंडल तो सिर्फ इस खेल का एक मोहरा है, जबकि सुशील मंडल इस गिरोह का मास्टरमाइंड (मुखिया) है, जो यात्रियों को बेहोश करने वाली नशे की गोलियां खरीदकर लाता था।

कैसे काम करती थी जहरखुरानों की यह गैंग?

  • निशाना: ये शातिर अपराधी आमतौर पर अकेले या जोड़े में सफर कर रहे यात्रियों को ही अपना मुख्य शिकार बनाते थे।
  • समय: वारदात के लिए ज्यादातर रात के वक्त को चुना जाता था, जब ट्रेन के बाकी यात्री गहरी नींद में सो रहे होते थे।
  • तरीका: चाय या पानी में मिलाने वाली यह जहरीली दवा महज 10 से 15 मिनट के भीतर अपना असर दिखाना शुरू कर देती थी। बातों में उलझाकर या ध्यान भटकाकर चुपचाप इसे मिला दिया जाता था।
  • लूट का माल: चोरी करने के बाद कीमती जेवर और नगद रुपए अपने पास रख लेते थे, जबकि बाकी का सामान रास्ते में कहीं फेंक देते थे।

फिलहाल, पुलिस फरार आरोपी सुशील मंडल की तलाश में जुटी है। सफर के दौरान अनजान लोगों पर आंख मूंदकर भरोसा करने वालों के लिए यह एक बहुत बड़ी चेतावनी है!

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