भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी करते हुए इसे 5.50 प्रतिशत कर दिया। केंद्रीय बैंक के इस फैसले के बाद शेयर बाजार में दबाव बढ़ गया और प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ कारोबार करते दिखाई दिए।
RBI ने मौद्रिक नीति का रुख भी बदलकर अधिक सख्ती की ओर संकेत दिया है। बढ़ती महंगाई, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और वैश्विक स्तर पर सख्त मौद्रिक परिस्थितियां इस फैसले के प्रमुख कारणों में शामिल मानी जा रही हैं। यह फरवरी 2023 के बाद RBI की पहली ब्याज दर वृद्धि है।
बाजार पर इसका तत्काल असर दिखाई दिया। निफ्टी 50 करीब 0.76 प्रतिशत गिरकर 22,603 के आसपास पहुंचा, जबकि सेंसेक्स करीब 0.59 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 72,639 के आसपास रहा। ऑटो, FMCG, रियल एस्टेट और मेटल सेक्टर पर ज्यादा दबाव देखा गया।
रेपो रेट बढ़ने से बैंक कर्ज की ब्याज दरों पर भी असर पड़ सकता है। होम लोन, वाहन लोन और दूसरे फ्लोटिंग रेट लोन की EMI बढ़ने की आशंका रहती है। हालांकि बैंकिंग कंपनियों को ऊंची ब्याज दरों से मार्जिन के स्तर पर कुछ फायदा मिल सकता है।






