नई दिल्ली। शिक्षा मंत्रालय ने असमिया, बांग्ला, मराठी, पालि और प्राकृत की शास्त्रीय परंपराओं के अध्ययन के लिए पांच उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने को मंजूरी दी है। इन केंद्रों का उद्देश्य भाषाओं की साहित्यिक और ज्ञान परंपराओं पर शोध बढ़ाना, ऐतिहासिक संसाधनों का संरक्षण करना और उन्हें डिजिटल रूप में उपलब्ध कराने में सहायता देना है।

शास्त्रीय असमिया का केंद्र असम के तेजपुर विश्वविद्यालय में और बांग्ला का केंद्र पश्चिम बंगाल के विश्वभारती विश्वविद्यालय में स्थापित होगा। मराठी के अध्ययन के लिए पुणे स्थित डेक्कन कॉलेज पोस्ट ग्रेजुएट एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट को चुना गया है। पालि का केंद्र ओडिशा केंद्रीय विश्वविद्यालय और प्राकृत का केंद्र गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय में बनेगा।
मंत्रालय के अनुसार, इन संस्थानों में उन्नत शोध और अकादमिक गतिविधियों के लिए समर्पित मंच तैयार किए जाएंगे। भाषाई और साहित्यिक संसाधनों के दस्तावेजीकरण, संरक्षण तथा डिजिटलीकरण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। संबंधित भाषाओं की ज्ञान परंपराओं तक व्यापक पहुंच भी केंद्रों के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।
पांच अलग-अलग राज्यों में बनने वाले ये केंद्र क्षेत्रीय उच्च शिक्षा और शोध संस्थानों को भी मजबूत करेंगे। इस पहल से भाषाओं के अध्ययन को संस्थागत समर्थन मिलेगा और उनकी ऐतिहासिक साहित्यिक धरोहर को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के प्रयास आगे बढ़ेंगे।






