नई दिल्ली। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने कहा है कि भारतीय वायुसेना को अगले कुछ वर्षों तक हर साल 36 से 40 लड़ाकू विमान शामिल करने की जरूरत है। उन्होंने नए विमानों की आपूर्ति में देरी पर चिंता जताते हुए कहा कि घटती स्क्वाड्रन संख्या को संभालने के लिए विमानों के शामिल होने की गति बढ़ानी होगी। यह बयान 8 अक्टूबर को होने वाले वायुसेना दिवस से पहले आया है।
वायुसेना प्रमुख के अनुसार, तेजस और अन्य प्रस्तावित विमान खरीद कार्यक्रम समय पर आगे बढ़ते हैं तो वार्षिक आपूर्ति में सुधार हो सकता है। उन्होंने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड की तेजस एमके-1ए उत्पादन क्षमता और प्रस्तावित मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट कार्यक्रम का उल्लेख किया। हालांकि, इन योजनाओं से अपेक्षित संख्या हासिल होना उत्पादन और खरीद प्रक्रिया की प्रगति पर निर्भर करेगा।
उन्होंने पाकिस्तान की चीन से पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान हासिल करने की योजनाओं को भी चिंता का विषय बताया। साथ ही कहा कि किसी विमान की क्षमता का आकलन पूरे सैन्य तंत्र में उसके इस्तेमाल और समन्वय के आधार पर होना चाहिए।
वायुसेना दूर तक मार करने वाली हवा से हवा में हमला करने की क्षमता बढ़ाने पर भी काम कर रही है। इसमें स्वदेशी अस्त्र मिसाइल और उसके विकसित संस्करण शामिल हैं। प्रमुख के बयान से स्पष्ट है कि नए विमान, मिसाइल क्षमता और समय पर उत्पादन वायुसेना के आधुनिकीकरण की प्रमुख जरूरतें हैं।







