भोपाल। अतिथि विद्वानों के आंदोलन के बीच पूर्व मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि “एक मुख्यमंत्री की घोषणा दूसरे मुख्यमंत्री को पूरी करनी चाहिए।” उनके इस बयान को अतिथि विद्वानों की लंबे समय से लंबित मांगों और पूर्व में की गई सरकारी घोषणाओं से जोड़कर देखा जा रहा है। शिवराज का यह बयान ऐसे समय आया है जब प्रदेशभर के अतिथि विद्वान अपनी मांगों को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे हैं और सरकार से पूर्व में किए गए वादों को पूरा करने की मांग कर रहे हैं।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकारें बदल सकती हैं, लेकिन जनता से किए गए वादों और घोषणाओं की जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती। उन्होंने कहा कि किसी भी मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा सरकार की प्रतिबद्धता होती है और उसे अगली सरकार या मुख्यमंत्री को भी पूरा करना चाहिए। उनके अनुसार इससे जनता का विश्वास बना रहता है और शासन की निरंतरता भी कायम रहती है।

अतिथि विद्वानों का कहना है कि वर्षों से वे नियमितीकरण, सेवा सुरक्षा और अन्य मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। उनका आरोप है कि पूर्व में कई घोषणाएं की गईं, लेकिन उनका पूरी तरह क्रियान्वयन नहीं हुआ। इसी कारण वे लगातार सरकार से अपने वादे निभाने की मांग कर रहे हैं।
शिवराज सिंह चौहान के बयान के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक चर्चा भी तेज हो गई है। विपक्ष इसे सरकार पर दबाव बढ़ाने वाला बयान बता रहा है, जबकि आंदोलनरत अतिथि विद्वानों ने इसे अपनी मांगों के समर्थन के रूप में देखा है।
अब सभी की नजर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सरकार पर है कि वह अतिथि विद्वानों की लंबित मांगों और पूर्व में की गई घोषणाओं को लेकर क्या निर्णय लेती है। यदि सरकार इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाती है तो लंबे समय से आंदोलन कर रहे हजारों अतिथि विद्वानों को बड़ी राहत मिल सकती है।







