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पहली और दूसरी लहर में युवा और बुजुर्गों पर टूटा था कहर, तीसरी लहर की चपेट में बच्चे

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भोपाल-इंदौर। मप्र में कोरोना संक्रमण बेकाबू हो गया है। राजधानी भोपाल में नवोदय स्कूल में कोरोना ब्लास्ट हुआ है। यहां रातीबड़ स्थित स्कूल में 60 बच्चे कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। एक शिक्षिका भी संक्रमित है। जो बच्चे संक्रमित पाए गए हैं उनमें से अधिकतर 10वीं और 12वीं के छात्र हैं। इसमें कई का टीकाकरण भी हो चुका है। विद्यार्थियों का कहना है कि स्कूल के कई शिक्षकों में कोरोना के लक्षण थे, इसके बाद भी वे निरंतर कक्षाएं ले रहे थे। यहां तक कि प्रैक्टिकल भी कराए जा रहे थे।

ओमिक्रॉन का कहर

कोरोना पहली और दूसरी लहर में जहां वयस्क और बुजुर्ग लोग ज्यादा प्रभावित हुए वहीं अब तीसरी लहर में बच्चें ज्यादा संक्रमित हो रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक तीसरी लहर में बच्चों के प्रभावित होने के कई कारण हो सकते हैं लेकिन इसमें सबसे बड़ा और प्रमुख कारण ओमिक्रॉन का अधिक संक्रामक होना है। इसके अलावा, कोविड नियमों में ठिलाई बरतना, सामूहिक सभा और मास्क के नियम का पालन न करना, सोशल डिस्टेंसिंग का खत्म होना कई कारण भी शामिल हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादातर मामलों में संक्रमण बहुत हल्का है लेकिन दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों में बीमारी के गहरे लक्षण दिख रहे हैं। जो शिशुओं में सांस संबंधी समस्याएं उत्पन्न कर सकते हैं।

मल्टी सिस्टम इन्फ्लेमेटरी सिंड्रोम के मामले

हालांकि मौजूदा समय में चिकित्सकों के सामने दो चिंताएं हैं। पहली बच्चों में मल्टी सिस्टम इन्फ्लेमेटरी सिंड्रोम (एमआईएससी) के बढ़ते मामले। यह समस्या कोविड संक्रमण होने के चार से छह सप्ताह के बाद नजर आ सकती है। दूसरी, चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बच्चों के लिए आईसीयू और गहन चिकित्सा बुनियादी ढांचे पर कोई दबाव नहीं है, लेकिन मामलों में बढ़ोतरी होने पर व्यवस्था चरमरा सकती है। खासतौर पर बच्चों की देखभाल के लिए उच्च प्रशिक्षण प्राप्त कर्मचारियों की कमी में ऐसा हो सकता है।

स्कूल प्रशासन की लापरवाही

भोपाल के नवोदय विद्यालय के मामले स्कूल प्रशासन की लापरवाही सामने आई है। नवोदय विद्यालय में करीब आठ दिन से कुछ शिक्षक बीमार थे। इसके बावजूद उन्हें स्‍कूल में बच्‍चों को पढ़ाने दिया जा रहा था। सबसे पहले जीव विज्ञान की शिक्षक बीमार हुई और वे वहीं छात्रावास में रह रही थी। उनके परिवार का बच्चा भी बीमार था। विद्यार्थियों का कहना है कि मेस के कर्मचारी भी बीमार थे। इसके बावजूद स्कूल व छात्रावास को बंद नहीं किया गया। अब बच्चों और शिक्षकों को घर भेज दिया गया है। स्कूल की प्राचार्य ज्योति मखीजा ने कहा कि स्कूल और छात्रावास बंद कर दिया गया है। हर दिन बच्चों के स्वास्थ्य की जानकारी भी ली जा रही हैं। बच्चों को आइसोलेशन में रखा गया है।

400 बच्चों का टेस्ट करवाया

कुछ दिन पहले स्कूल के 3 टीचर पॉजिटिव आए थे। इसलिए एहतियातन स्कूल के करीब 400 बच्चों के टेस्ट करवाए गए थे। इनमें से ये बच्चे पॉजिटिव निकले। हालांकि, कोई भी बच्चा गंभीर नहीं है। अधिकांश को सर्दी-जुकाम, खरास, बुखार आदि लक्षण भी नहीं है।

इंदौर में 350 से ज्यादा बच्चे संक्रमित

बात यदि इंदौर की करें तो इस माह अभी तक शहर में 350 से ज्यादा बच्चे संक्रमित हो चुके हैं। 1 से लेकर 13 जनवरी तक संक्रमित हुए रोगियों में 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की संख्या भी 30 से 50 प्रतिदिन आ रही है, लेकिन उनके लक्षणों में गंध न आना, बुखार होना शामिल नहीं है। हल्की सर्दी-जुकाम के बाद बच्चे जांच में संक्रमित आ रहे हैं। डाक्टरों का कहना है कि कोविड प्रोटोकाल का बच्चे ठीक तरह से पालन नहीं कर पाते हैं।Þ

अस्पताल में भर्ती होने जैसे हालात नहीं

कोरोना की तीसरी लहर में बच्चे भी संक्रमित हो रहे है, लेकिन अस्पताल में भर्ती होने जैसे हालात नहीं है। सामान्य इलाज से बच्चे ठीक हो रहे है। इस माह अभी तक 350 से ज्यादा बच्चे संक्रमित हो चुके है। -बीएस सैत्या, सीएमएचओ, इंदौर

सागर-उज्जैन भी बड़े हॉट स्पॉट बने

इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर के साथ सागर और उज्जैन भी कोरोना के बड़े हॉट स्पॉट बन चुके हैं। 24 घंटे में प्रदेश के 31 जिलों में डबल डिजिट में केस हैं। वहीं, इंदौर-भोपाल में 4 और ग्वालियर, जबलपुर, सागर और उज्जैन में 3 डिजिट में पॉजिटिव केस मिले हैं।

इंदौर में रिपीट पॉजिटिव का ट्रेंड

इंदौर में रिपीट पॉजिटिव की संख्या भी तेजी से बढ रही है जिसके कारण ऐसे मरीजों की आइसोलेशन की अवधि भी बढ़ रही है जबकि आईसीएमआर की नई गाइड लाइन में 3 से 7 दिनों में डिस्चार्ज किया जा रहा है। ऐसे में रिपीट पॉजिटिव सैम्पलों ने सवाल खड़े कर दिए हैं। दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि एक व्यक्ति दो-तीन बार अपनी जांच कराता है जिससे रिपीट सैम्पलों की संख्या बढ़ रही है। इंदौर में जनवरी के 12 दिनों में तो रिपीट पॉजिटिव की संख्या 383 तक जा पहुंची है जो संक्रमितों मरीजों का 5.59 फीसदी है।

इंदौर में लैब संचालकों पर सख्ती

कोरोना की तीसरी लहर में भी इंदौर फिर हाईरिस्क जोन में आ गया है। हालात नहीं सुधरे तो शहर में जल्द ही लॉकडाउन हो सकता है। कोरोना हालात की समीक्षा बैठक में शहर में कोरोना की स्थिति पर चिंता जाहिर की गई। इस बीच इस बीच मुख्यमंत्री द्वारा कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर प्रदेश में पाबंदियां बढ़ाने बाद इंदौर कलेक्टर ने भी लोकल गाइड लाइन जारी की है। इसके तहत अब कोविड सैैम्पल लेने के दौरान गलत मोबाइल नंबर व पता पाए जाने पर लैब के खिलाफ एफआईआर दर्ज होगी। इसके साथ ही मास्क नहीं पहनने या नाक के नीचे होने पर 200 रु. जुर्माना होगा। गाइड लाइन के तहत सभी प्राइवेट लैब संचालकों को निर्देश दिए गए हैं कि सैम्पल लेते समय संबंधित व्यक्ति का मोबाइल नंबर व पता अवश्य डाले। संबंधित व्यक्ति द्वारा दिए गए मोबाइल नंबर की पुष्टि अवश्य की जाएं। इसके साथ ही घर के पते की पुष्टि उसके फोटोयुक्त पहचान पत्र जैसे आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस आदि से की जाएं। गलत नंबर व या गलत पता पाए जाने पर लैब के खिलाफ धारा 144 के आदेश का उल्लंघन माना जाकर यह धारा 188 के तहत अपराध माना जाएगा और केस दर्ज किया जाएगा।