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World Population Day 2021: जानें इस बार की क्‍या है थीम, क्‍यों मनाया जाता है जनसंख्‍या दिवस

नेहल यादव। 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाने की शुरुआत साल 1989 में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की संचालक परिषद द्वारा की गई थी। उस समय विश्व की जनसंख्या लगभग 500 करोड़ थी। विश्व जनसंख्या दिवस का उद्देश्य विभिन्न जनसंख्या मुद्दों पर लोगों की जागरूकता बढ़ाना है। जैसे कि परिवार नियोजन, लिंग समानता , गरीबी , मातृ स्वास्थ्य और मानव अधिकारों का महत्व के बारे में उन्हें बताना और समझाना है।

साथ ही लोगों को बढ़ती जनसंख्या के प्रति सचेत करने का है। अगर जनसंंख्या लगातार इसी तरह बढ़ते रही तो दुनिया में बहुत बड़ा संकट आ सकता है। भले ही किसी भी देश की जनसंख्या उस देश के लिए ह्यूमन रिसोर्सेस के तौर पर उपयोगी है, लेकिन लगातार बढ़ती जनसंख्या उसी देश के लिए परेशानी का एक बड़ा कारण भी बन सकती है शिक्षा का ना होना , बेरोजगारी, भुखमरी और गरीबी तेज़ी से बढ़ती आबादी का ही रिजल्ट है।

विश्व जनसंख्या दिवस 2021 की थीम

इस बार विश्व जनसंख्या दिवस 2021 की थीम है – अधिकार और विकल्प उत्तर हैं चाहे बेबी बूम हो या बस्ट, प्रजनन दर में बदलाव का समाधान सभी लोगों के प्रजनन स्वास्थ्य और अधिकारों को प्राथमिकता देना है। वही पिछले साल 2020 में कोरोना काल के दौरान इसकी थीम का विषय विशेष रूप से कोरोना वायरस (COVID-19) महामारी के समय में दुनिया भर में महिलाओं और लड़कियों के स्वास्थ्य और अधिकारों की सुरक्षा पर आधारित रखी गई थी ।

लोगों से इस दिन खुलकर चर्चा की जाती है।

देश में आखिरी बार जनगणना 2011 में हुई थी। इस जनगणना को एक दशक पूरा हो चुका है। इस एक दशक में देश में बहुत कुछ बदल गया है। 2011 की जनगणना के अंतिम आंकड़ों के मुताबिक, भारत की आबादी 1.21 अरब यानी 121 करोड़ थी जो अब 2021 में भारत की जनसंख्या लगभग 139 करोड़ हो चुकी है।अब तक देश में सबसे ज्यादा जनसंख्या वाले 5 राज्यों की बात करे तो उत्तरप्रदेश की जनसख्या लगभग 22 से 25 करोड़ के बिच है उसके बाद बिहार जिसकी जनसख्या लगभग 12.70 करोड़, महाराष्ट्र की लगभग 12.43 करोड़, पश्चिम बंगाल की लगभग 10 करोड़ और मध्यप्रदेश की पाचवे नंबर पर 8 .70 करोड़ है।

वर्ल्ड पॉपुलेशन डे पर पूरी दुनिया में पॉपुलेशन कंट्रोल करने के लिए लोगों को परिचित कराया जाता है। इसके लिए अलग अलग जगह और राष्ट्रिय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भी बैठके की जाती है चर्चाए भी होती है , जो फ़िलहाल कोरोना वायरस के प्रकोप की वजह से पिछले साल से बंद हैं। इसके अलावा परिवार नियोजन के मुद्दे पर लोगों से बातचीत और जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रमों के जरिए लोगों को जागरूक करने की कोशिश की जाती है. जेंडर एक़्वालिटी , मां और बच्चे का स्वास्थ्य, जेंडर एजुकेशन, गर्भनिरोधक दवाओं के इस्तेमाल से लेकर यौन संबंध जैसे सभी गंभीर विषयों पर लोगों से इस दिन खुलकर चर्चा की जाती है। तेज गति से बढ़ रही जनसंख्या से पर्यावरण को भी नुकसान होने लगा है।