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एमपी में तीन तलाक कानून से महिलाएं हुई मजबूत, 252 महिलाएं खुद हुईं पति से अलग

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भोपाल। तीन तलाक कानून के बाद मुस्लिम महिलाएं अब मुखर हो गई हैं। वे खुद तलाक मांगने आ रही हैं। एक साल में 252 महिलाओं ने तलाक लिया है और इनमें से कई ने मैहर भी नहीं लिया। हालांकि, कुछ महिलाएं ऐसी भी हैं, जिन्होंने पति से राजीनामा कर लिया और वापस ससुराल चली गईं। जो पति से राजीनामा होने पर वापस ससुराल चली गई।

जानकारी के अनुसार पिछले साल जुलाई से लेकर इस साल जून तक 252 महिलाओं ने तलाक लिया है। ये महिलाएं किसी भी कीमत पर पति के साथ नहीं रहना चाहतीं। मसाजिद कमेटी के परामर्श केंद्र के पास पिछले एक साल से 622 मामले पेंडिंग पड़े हुए हैं। यहां तलाक मांगने वालों की काउंसलिंग की जाती है।

दो माह बाद ही टूट रहा रिश्ता

परामर्श केंद्र के काउंसलर आफताब अहमद ने बताया कि जब से तीन तलाक कानून बना है, तभी से महिलाएं जागरूक हुई हैं। महिलाएं खुद तलाक मांगने आ रही हैं। कई मामलों में निकाह को अभी दो या तीन महीने ही हुए हैं। यह सभी महिलाएं शादी खत्म करने मैहर तक माफ कर रही हैं। लॉकडाउन के बाद रोजाना 10 केस आ रहे हैं, लेकिन काउंसलिंग सिर्फ 6-8 मामलों की ही कर पाते हैं। परामर्श केंद्र के पास पिछले एक साल के 622 मामले पेंडिंग हैं।

पति से अलग होने पर अड़ी महिलाएं

जानकारी के मुताबिक, तलाक लेने वाली इन महिलाओं का जोर इस बात पर रहता है कि आपसी सहमति से अपने पति से संबंध विच्छेद हो जाए। इसके लिए वे मैहर की रकम माफ करने को तैयार रहती हैं। साथ ही इस बात का भी शपथ पत्र देती है कि वह भरण-पोषण नहीं मागेंगी.परामर्श केंद्र में महिलाओं को समझाया भी गया, लेकिन उनका एक ही जवाब रहा कि उन्हें तलाक चाहिए।

लव मैरिज वाले मामले भी

परामर्श केंद्र के मुताबिक, इस्लाम में तलाक महिला का अधिकार है। पति चाहे तो इसके पालन में वह महिला से संबंध विच्छेद कर सकता है। सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि जिन महिलाओं ने लव मैरिज की है, वह भी तलाक मांग रही हैं। ऐसे कुछ मामले की भी यहां काउंसलिंग हुई है। लेकिन, इसका कोई फायदा नहीं हुआ।