////

आदिवासी बस्ती में घने जंगलों में पहाड़ पर क्रिकेट का ऐसा है जुनून

बच्चे बगैर संसाधनों के पहाड़ पर क्रिकेट खेलते हैं।

दमोह। बात जब क्रिकेट की होती है तो आज हिंदुस्तान का हर शख्स इसका दीवाना है। महानगर से लेकर छोटे शहरों तक इसका जुनून लोगों के सर चढ़कर बोलता है, लेकिन जब घने जंगलों में स्थित एक आदिवासी बस्ती में कम उम्र की लड़कियों में क्रिकेट की दिवानगी देखने को मिले तो ये बात काफी अचंभित करती है।

आदिवासी गांव में क्रिकेट का उत्साह

प्रकति की गोद में बसा ये है सिग्रामपुर गांव। हर तरफ घने दरख्त और ऊंचे-ऊंचे पहाड़ इसके चारों और डेरा डाले हुए हैं। आवागमन के लिए कोई वाहन यहां नहीं आता है और गांव को रोशन करे के लिए यहां बिजली भी नहीं है, लेकिन यहां पर कम्र की लड़कियों के हौंसले काफी बुलंद है। यहां के बच्चों में खासकर लड़कियों में क्रिकेट का काफी जुनून है और इसका जादू उनके सर चढ़कर बोल रहा है। किसी की ख्वाहिश सचिन बनने की है तो कोई राहुल द्रविड़ बनने के ख्वाब पाले बैठा है। यहां पर बच्चे जंगल की लकड़ी से बैट बनाकर क्रिकेट खेलते हैं। इस गांव की खासीयत यह है कि लड़कियों की यहां पर अलग टीम है।

जंगल की लकड़ियों से बनाया बैट

घने जंगल के बीच पहाड़ी पर स्थित रिचकुड़ी टोला में पहाड़ी की चोटी पर बच्चे जंगलो से संसाधनों को जुटाकर अपनी क्रिकेट खेलने की ख्वाहिश को पूरा करते हैं। जब इन बच्चों के क्रिकेट के प्रति लगाव की खबर जब दमोह के सामाजिक संगठन सिविल सोसायटी को लगी तो उन्होंने बच्चियों के प्रोत्साहन के लिए एक क्रिकेट मैच आयोजित करवाया और क्रिकेट खेलने की पूरी एक किट बच्चियों को भेंट की।  सिविल सोसायटी के लोगों ने जब इन बच्चियों को क्रिकेट खेलते देखा तो वे काफी आश्चर्यचकित हुए। क्रिकेट भी एकदम देसी अंदाज में खेला जाता है। यदि बैट नहीं तो जंगल की लकड़ी ही बैट का काम करती और साथ ही चौके छक्कों की बौछार भी होती है। वहीं मैदान की दर्शक दीर्घा में बैठे लोग बच्चों की हौसला अफजाई करते है।