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Tokyo Olympics 2020: मीराबाई चानू ने सिल्‍वर जीत रचा इतिहास

नई दिल्ली। टोक्यो ओलिंपिक में मीराबाई चानू ने भारत को पहला मेडल दिलाया है। मीराबाई चानू ने ये कमाल 49 किलोग्राम भारवर्ग की महिला वेटलिफ्टिंग में किया। उन्होंने स्नैच और क्लीन एंड जर्क राउंड मिलाकर कुल 202 किलो वजन उठाया और सिल्वर मेडल जीता। मीराबाई ने स्नैच राउंड में 87 किलो वजन उठाया तो वहीं क्लीन एंड जर्क में उन्होंने 115 किलो वजन उठाया। 49 किलोग्राम भारवर्ग की महिला वेटलिफ्टिंग में स्वर्ण पदक चीन की वेटलिफ्टर ने जीता।

49 किलोग्राम भारवर्ग के महिला वेटलिफ्टिंग की शुरुआत स्नैच राउंड से हुई। इसमें मीराबाई चानू ने अपने पहले प्रयास में 81 किलोग्राम वजन उठाया। इसके बाद दूसरे प्रयास में उन्होंने 87 किलोग्राम वजन उठाया। हालांकि मीराबाई चानू का तीसरा प्रयास विफल रहा। तीसरे प्रयास में वो 89 किलोग्राम वजन उठाने आईं थी। अगर वो इस वजन को उठा लेतीं तो स्नैच राउंड में ये उनका पर्सनल बेस्ट होता। लेकिन, वो ऐसा नहीं कर सकीं और स्नैच राउंड में उनका सबसे ज्यादा भार 87 किलोग्राम दर्ज किया गया। स्नैच राउंड में मीराबाई सभी महिला वेटलिफ्टर्स के बीच दूसरे नंबर पर रही। पहला स्थान चीन की वेटलिफ्टर ने हासिल किया, जिन्होंने स्नैच में 94 किलो वजन उठाकर नया ओलिंपिक रिकॉर्ड बनाया। भारत की मीराबाई चानू और चीनी वेटलिफ्टर के बीच स्नैच राउंड में कुल 7 केजी का फासला रहा।

यह वेटलिफ्टिंग में दूसरा पदक है

ओलंपिक में वेटलिफ्टिंग में सिल्वर जीतने वाली पहली भारतीय बनीं मीराबाई ने न्यूज 18 लोकमत से एक खास इंटरव्यू में कहा, ‘मैं शब्दों में इसे बयां नहीं कर सकती कि कितना खुश महसूस कर रही हूं.बता नहीं सकती मुझे बहुत गर्व महसूस हो रहा है, यह वेटलिफ्टिंग में हमारा दूसरा पदक है. मैं महासंघ, मेरे कोच, परिवार और सभी समर्थकों को धन्यवाद देना चाहती हूं.’

सपने को साकार करने के लिए कड़ा संघर्ष किया

मणिपुर की मीराबाई ने आगे कहा कि उनका लक्ष्य टोक्यो खेलों में पदक जीतना था और इसलिए उन्होंने अपने सपने को साकार करने के लिए कड़ा संघर्ष किया। उन्होंने कहा, ‘मैंने इसके लिए काफी मेहनत की है और संघर्ष किया, बहुत कुछ बलिदान भी किया। टोक्यो ओलंपिक में पदक जीतना ही मेरा लक्ष्य था। यह मेरे सपने के सच होने जैसा है। मीराबाई की जीत पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसी दिग्गज हस्तियों ने उन्हें बधाई भी दी। उनकी जीत पर कोच विजय कुमार भी बेहद खुश हैं। विजय ने उम्मीद जताई कि यह पदक वेटलिफ्टिंग के भविष्य में देश के लिए पदक लाने के लिए और कई खिलाड़ियों को प्रेरित करेगा। विजय ने कहा, ‘मुझे उम्मीद है कि यह पदक इस खेल में हिस्सा लेने के लिए और अधिक खिलाड़ियों को प्रेरित करेगा। भविष्य में हमारे पास और ओलंपिक पदक होंगे।

कोच ने कहा कि उनकी उम्मीदें स्वर्ण जीतने की थी

विजय ने साथ ही खेल मंत्रालय और भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) को भी धन्यवाद दिया जिसकी मदद से ओलंपिक से पहले मीराबाई को ट्रेनिंग के लिए अमेरिका भेजा गया। उन्होंने कहा, ‘मंत्रालय और SAI ने हमें प्रतियोगिता से पहले प्रशिक्षण के लिए अमेरिका भेजा। कोरोना वायरस के कारण परिस्थितियां ट्रेनिंग के लिए सही नहीं थी और इसलिए हम वहां गए जिससे काफी मदद मिली.’ कोच ने कहा कि उनकी उम्मीदें स्वर्ण जीतने की थी लेकिन वह इस प्रदर्शन से काफी खुश हैं। उन्होंने कहा, ‘हम सोने के लिए खेलना चाहते थे लेकिन हम प्रदर्शन से खुश हैं। हम सभी खुश हैं कि टोक्यो में हमारे देश का पहला पदक भारोत्तोलन के से आया है।