/

मानसून में इस बीमारी का बढ़ जाता है खतरा, जानिए लक्षण

Start

इंदौर। मानसून का समय ज्यादातर लोगों के लिए राहत लेकर आता है। झमाझम बारिश से लोगों को भारी गर्मी से आराम मिलता है। लेकिन अस्थमा पीड़ितों के लिए यह समय मुश्किलभरा होता है और उनकी स्थिति को और ज्यादा खराब कर देता है अस्थमा का मौसमी बदलाव के कारण बढ़ जाना एक सुपरिचित घटना है अस्थमा की बीमारी एलर्ज, जैसे मोल्ड/फंगस, पालतू पशुओं के बाल, डस्ट माईट्स एवं वायरल संक्रमण से बढ़ सकती है मानसून भी अस्थमा की बीमारी के बढ़ने का एक मुख्य कारण है।

आ सकता है अस्थमा अटैक

बारिश के मौसम में कम धूप मिलने के कारण विटामिन डी की कमी हो जाती है, जो अस्थमा के अटैक के बिगड़ने का एक मुख्य कारण है। मानसून के दौरान ठंडा वातावरण भी अस्थमा के लक्षणों व संकेतों को और ज्यादा खराब कर सकता है। आसपास के वातावरण में नमी से फंगस हो सकती है, जिससे एलर्जी बढ़ सकती है और अस्थमा का अटैक आ सकता है। साथ ही इस मौसम में वायरल संक्रमण की संभावनाएं ज्यादा हो जाती हैं तथा एलर्जन बढ़कर लक्षणों को और ज्यादा गंभीर बना सकते हैं।

अस्थमा के लक्षण

डॉ. गौरव गुप्ता एमडी चेस्ट इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजिस्ट थोरैसिक एंडोस्कोपिस्ट और स्लीप स्पेशलिस्ट चोइथराम हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर ने कहा घरघराहट खांसी और सांस की तकलीफ अस्थमा के लक्षण हैं। यह सांस की एक क्रोनिक बीमारी है जो फेफड़ों में मौजूद हवा की नलियों में सूजन के कारण उत्पन्न होती है। अस्थमा पीड़ित को हवा की नली में सिकुड़न महसूस होती है जिसके कारण मरीज को सामान्य रूप से सांस लेना मुश्किल हो जाता है।

ऐसे करें रोकथाम

डॉ. गौरव गुप्ता एमडी चेस्ट इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजिस्ट थोरैसिक एंडोस्कोपिस्ट और स्लीप स्पेशलिस्ट चोइथराम हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के अनुसार अस्थमा के अटैक के इलाज के लिए आपातकालीन कक्ष में जाने के मामले बारिश के मौसम में बढ़ गए जो नमी में वार्षिक वृद्धि के साथ एक या दो महीने बढ़े और शुष्क मौसम में कम हो गए। यह पारस्परिक संबंध घर में डस्ट माईट्स और वायरल संक्रमण के प्रसार के साथ संबंध होने की संभावना बढ़ाता है। इसलिए यह जरूरी है कि अस्थमा के प्रबंधन के लिए मॉनसून के दौरान सांस की समस्याओं के लिए डॉक्टर के परामर्श से काम किया जाए।

अस्थमा को रखे नियंत्रण में

हर बार मानसून में अस्थमा के कारण अस्पताल में आने वाले लोगों में भारी वृद्धि हो जाती है यह वृद्धि खासकर बच्चों में होती है मौजूदा परिदृश्य में जब मरीज अस्पताल जाने या डॉक्टर से नियमित रूप से परामर्श लेने में असमर्थ हैं तब अस्थमा को बढ़ने से रोकना और भी ज्यादा जरूरी हो गया है। इसलिए यह बहुत आवश्यक है कि अस्थमा को नियंत्रण में रखा जाए सबसे अच्छा यह होगा कि मॉनसून के दौरान अस्थमा के प्रबंधन के लिए उपयोगी परामर्श सदैव अपने साथ रखे जाएं।