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आस्था को हवा में उड़ाती इंदौर नगर निगम की करतूत, अमर्यादित तरीके से गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन

इंदौर। इंदौर के धार रोड पर गिट्‌टी खदान में नगर निगम कर्मचारियों ने आस्था का अपमान किया है। सोमवार को आस्था को हवा में उड़ाती ये तस्वीरें है देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर की। जहां इंदौर-नगर निगम गणेश प्रतिमाओं से खिलवाड़ कर रहा है। वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि नगर निगम की टीम अमर्यादित तरीक़े से गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन कर रही है। ट्रक से एक के बाद भगवान गणेश की मूर्तिओं को ऐसे फेका जा रहा है जैसे कचरा वाहन से कच्चा। तस्वीरें देखने के बाद लोगों की जनभावनाएं आहत हो रही है।

इसका वीडियो सामने आने के बाद अधिकारियों ने पहले इसे इंदौर का होने से इनकार कर दिया। फिर बाद में इसकी पृष्टि की। इस मामले में अपर आयुक्त की फटकार के बाद अधिकारियों ने माफी मांगते हुए व्यवस्था बनाने की बात कही है। नगर निगम ने 85 वार्डों में गणेश प्रतिमा विसर्जन की व्यवस्था की थी। उसमें पीओपी की मूर्तियों को व्यवस्थित तरीके से गिट्‌टी खदान वाले स्थान पर विसर्जित करने की बात कही थी। सोमवार को इसका काम किया जाना था, लेकिन खदान में अधिकारियों के हटते ही निगमकर्मियों ने मूर्तियों को बुरी तरह से बाहर फेंकना शुरू कर दिया। अपर आयुक्त अभय राजगांवकर को गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन की व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मामला सामने आने के बाद राजगांवकर ने गलती मानते हुए नई व्यवस्था बनाने की बात की है।

कर्मचारियों की पहचान के बाद कार्रवाई की बात कही है

आयुक्त प्रतिभा पाल ने भी इस मामले में अधिकारियों को फटकार लगाई। उनके मुताबिक, कर्मचारियों का यह तरीका उचित नहीं था। मूर्तियों को एक चेन सिस्टम से पानी में विसर्जित करना था। उन्होंने अपने एक आदेश का हवाला देकर धार्मिक रीति रिवाज से मूर्ति विसर्जित की बात कही थी। उन्होंने कर्मचारियों की पहचान के बाद कार्रवाई की बात कही है

विसर्जन करना दुर्भाग्यपूर्ण है

शहर कांग्रेस अध्यक्ष विनय बाकलीवाल ने इसे आस्था के साथ खिलवाड़ बताया। उन्होंने कहा कि घर-घर से विसर्जन के लिए लाई गई प्रतिमा का कितनी गलत तरीके से विसर्जन करना दुर्भाग्यपूर्ण है। अगर नगर निगम विधि विधान से गणेश जी की प्रतिमा को विसर्जन नहीं कर पा रहा था, तो इसको प्रतिमा ले जाने की जरूरत क्या थी।