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सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट का दावा, अयोध्या मामले में शाहरुख खान से मध्यस्था चाहते थे चीफ जस्टिस बोबडे

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नई दिल्ली। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एस. ए. बोबडे के विदाई से पहले उने कार्यकाल से जुड़े हुए कुछ खास राज उजागर हुए हैं, इसमें से एक अयोध्या से जुड़ा हुआ मामला भी है, जिसका फैसला देने वाले जजों में वे शामिल थे। सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट विकास सिंह ने कहा कि जस्टिस बोबडे ने अभिनेता शाहरुख खान से इस मामले में मध्यस्थता करने के लिए कहा था और शाहरुख खान ने इस पर सहमति भी जता दी थी।

शाहरुख खान ने जताई थी सहमति

सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट विकास सिंह ने इस बात का खुलासा शुक्रवार को किया और कहा कि जब जस्टिस बोबडे अयोध्या मामले में शुरुआती समय में थे, तब भी उनका मत स्पष्ट था कि इस विवाद को मध्यस्थता से निपटाया जाना चाहिए। चूंकि मैं शाहरुख खान के परिवार से अच्छी तरह से परिचित हूं, इसलिए उन्होंने मुझसे यह पूछा था कि क्या शाहरुख मध्यस्थता के लिए तैयार होंगे ?” सिंह ने बताया कि उन्होंने इस बारे में शाहरुख खान से बात भी की थी और उन्होंने इसमें रुचि भी दिखाई थी। उस वक्त शाहरुख का मानना था कि यह हिंदुओं और मुस्लिमों को एकसाथ लाने का सबसे अच्छा तरीका है।

हिंदू-मुस्लिम एकता की कही थी बात

एडवोकेट विकास सिंह ने बताया कि शाहरुख कान ने मुझसे कहा था कि मंदिर की आधारशिला किसी मुस्लिम शख्स द्वारा रखी जाए और मस्जिद की आधारशिला किसी हिंदू द्वारा रखी जाए, लेकिन यह योजना सफल नहीं हो सकी। गौरतलब है सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच जिसमें तत्कालीन सीजेआई रंजन गोगोई, जस्टिस बोबडे, डीवाई चंद्रचूड़, अशोक भूषण और एस ए नजीर शामिल थे, उन्होंने मार्च 2019 में अयोध्या विवाद में मध्यस्थता के माध्यम से हल निकालने के लिए कहा था। कोर्ट ने इस मामले में तीन सदस्यों वाली कमेटी का भी गठन किया था, जिसमें कोर्ट के पूर्व जज एफएम इब्राहीम खलीफुल्ला, श्रीश्री रविशंकर और सीनियर एडवोकेट श्रीराम पंचू शामिल थे।

जस्टिस बोबडे को है बाइक का शौक

एडवोकेट विकास सिंह ने जस्टिस बोबडे के एक ओर राज का खुलासा किया। उन्होंने कहा कि वह अपनी हार्ले डेविडसन बाइक बेचना चाहता था। बोबडे को बाइक्स काफी पसंद हैं। मैं जब उनके साथ एक फ्लाइट में सफर कर रहा था, तब मैंने उनसे कहा कि मैं अपनी बाइक को बेचना चाहता हूं। बोबडे ने कहा कि वे उस बाइक को खरीदना चाहेंगे। तो मैंने उसे उनके पास भेज दिया और कहा कि यह काफी भारी है, लेकिन जस्टिस बोबडे ने जवाब दिया कि वह बचपन से ही बाइक चलाते आ रहे हैं। इस बाइक की वजह से वे गिर भी गए और उनको हल्की चोट भी लगी। उन्होंने मुझे बताया कि बाइक के वजन की वजह से वे नहीं गिरे थे, बल्कि साइड स्टैंड की वजह से ऐसा हुआ था।” इस चोट की वजह से न सिर्फ अयोध्या विवाद पर सुनवाई चार हफ्ते के लिए प्रभावित हुई थी, बल्कि उन्हें बाइक के लिए किसी दूसरे खरीदार को भी तलाशना पड़ा था।