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Sawan Mass 2021: शास्त्रों में बिल्वपत्र का है ऐसा वर्णन, जानिए इसका महत्व और मिलने वाला फल

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Sawan Mass 2021: शिव कल्याण के प्रदाता है, सुख-संपत्ति के दाता है, कष्टों का हरण करने वाले मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाले त्रिनेत्रधारी, गंगाधर, चंद्रमा को मस्तक पर विराजित कर भक्तों को अभय और मोक्ष का वरादन देवे वाले हैं। कैलाशपति को बिल्वपत्र अतिप्रिय है इसलिए शिवपूजा में बिल्वपत्र का विशिष्ठ स्थान है और महादेव आराधना में सिर्फ बिल्वपत्र समर्पित करने से समस्त पूजा का लाभ मिलता है।

अनंत गुना देता है फल

सनातन संस्कृति के शास्त्रों में कहा गया है कि महादेव को बिल्वपत्र समर्पित करने से 1 करोड़ कन्याओं के कन्यादान के बराबर फल प्राप्त होता है। बिल्वपत्र के वृक्ष के नीचे बैठकर तपस्या, आराधना, मंत्रजाप या स्तुति करने से अनंत गुना फल की प्राप्ति होती है। बिल्वपत्र के वृक्ष में देवी महालक्ष्मी का वास माना गया है। शास्त्रों में सूर्य को बिल्वपत्र समर्पित करने का विधान है। सूर्यदेव को पूरी डंडी तोड़कर बिल्वपत्र अर्पित करने का विधान बतलाया गया है।

। न यजैद् बिल्व पत्रैश्च भास्करं दिवाकरं वृन्तहीने बिल्वपत्रे समर्पयेत।।

स्कन्द पुराण में बिल्वपत्र की महिमा का गुणगान करते हुए कहा गया है कि बिल्वपत्र कभी बासी और अशुद्ध नहीं होते हैं। इसलिए इनके जल से दोकर समर्पित किया जा सकता है।

अर्पितान्यपि बिल्वानि प्रक्षाल्यापि पुन: पुन:।
शंकरार्यर्पणियानि न नवानि यदि क्वाचित।।

कुछ विशेष अवसरों जैसे शिवरात्रि, श्रावण, प्रदोष, सोमवार पर बिल्वपत्र शिवलिंग पर समर्पित करने से पूजा का अनन्त गुना फल प्राप्त होता है। प्राकृतिक बिल्वपत्र उपलब्ध ना होने की अवस्था में स्वर्ण,रजत या ताम्र का बिल्वपत्र चढ़ाया जा सकता है। इस तरह के बिल्वपत्र का फल भी प्राकृतिक बिल्वपत्र के समान मिलता है।

इन नियमों का रखें ध्यान

लेकिन बिल्ववृक्ष देवतुल्य वृक्ष है इसलिए इससे बिल्वपत्र तोड़ते समय कुछ नियमों का ख्याल रखना पड़ता है। लिंगपुराण के अनुसार चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी, अमावस्या, संक्रांति काल और सोमवार को बिल्वपत्र तोड़ना निषिद्ध माना गया है। इसलिए इन दिनों में बिल्वपत्र शिव को चढ़ाने के लिए एक दिन पहले बिल्वपत्र तोड़कर रख लेना चाहिए।