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Sawan 2021: महादेव हैं विनाशक अस्त्र-शस्त्र के स्वामी, जानिए इनके बारे में

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Sawan 2021: महादेव को सृष्टि की बुराइयों के संहार का देवता कहा जाता है तो कल्याण का देवता भी माना जाता है। कैलाश पर्वत पर निवास करने वाले भोलेनाथ अमोघ और दुर्लभ अस्त्र-शस्त्रों के रचयिता हैं। ब्रह्मांड की रक्षा और जगत कल्याण के लिए उन्होंने इन अस्त्र-शस्त्र को देवी-देवताओं को प्रदान किया और भयानक, शक्तिशाली असुरों से जगत काी रक्षा की। आइए जानते हैं महादेव के अमोघ हथियारों को।

पिनाक

महादेव के धनुष को पिनाक नाम से जाना जाता है। पिनाक की टंकार इतनी भयानक है कि इसकी ध्वनी से धरती पर भयानक कंपन पैदा होते थे और बादल फट जाते थे। महादेव ने त्रिपुरासुर की तीनों नगरियों को पिनाक के मात्र एक बाण से नष्ट कर दिया था। मान्यता है कि देवी और देवताओं के युग की समाप्ति के बाद इस पिनाक को देवरात को दे दिया गया था।

राजा दक्ष के यज्ञ में यज्ञ का भाग शिव को नहीं देने के कारण महादेव अत्यंत क्रोधित हो गए थे। क्रोधाग्नि में जल रहे शिव ने पिनाक से देवताओं को नष्ट करने का संकल्प लिया तो उसकी टंकार से धरती का वातावरण बहुत भयानक हो गया था। काफी मान-मनौव्वल के बाद भोलेनाथ का क्रोध शांत हुआ था और उसके बाद उन्होंने यह धनुष देवताओं को सौंप दिया था।

देवताओं ने इस धनुष को राजा जनक के पूर्वज निमि के ज्येष्ठ पुत्र देवरात को सौंप दिया था। यही शिव-धनुष पिनाक राजा जनक के पास धरोहर के रूप में रखा हुआ था। इस धनुष को कैलापति शिव ने स्वयं अपने हाथों से बनाया था इसलिए यह इतना शक्तिशाली, वजनदार और विशालकाय था कि सामान्य व्यक्ति के पास इसको उठाने का सामर्थ्य नहीं था। भगवान श्रीराम ने सीता स्वयंवर में इस धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाकर इसको तोड़ दिया था।

श्रीशिव का चक्र

भोलेनाथ के पास भवरेंदु नाम का शक्तिशाली औऱ अमोघ चक्र है। भगवान विष्णु के पास कांता और देवी दुर्गा के पास मृत्यु मंजरी नाम का चक्र है। मान्यता है कि सुदर्शन चक्र का निर्माण भी नीलकंठ महादेव ने किया था। इस चक्र को उन्होंने भगवान लक्ष्मीनारायण को सौंप दिया था। श्रीहरी के बाद यह चक्र देवी पार्वती के पास आ गया। मां पार्वती ने इस अमोघ चक्र को परशुराम को प्रदान किया। चिरंजीवि परशुराम ने इस चक्र को श्रीकृष्ण को भेंट कर दिया था।

भोलेनाथ का त्रिशूल

महादेव अनेकों दिव्यास्त्रों के स्वामी है। इन्ही दिव्यास्त्रों में से एक त्रिशूल है। महादेव ने अपने सभी अस्त्र- शस्त्र देवताओं को जगत कल्याण के लिए भेंट कर दिए थे, लेकिन त्रिशूल को सदा अपने पास रखा। महाकाल के त्रिशूल को दैहिक, दैविक और भौतिक कष्टों के विनाश का प्रतीक माना जाता है। शास्त्रोक्त मान्यता है कि इसमें तीन तरह की शक्तियां सत, रज और तम समाई हुई है।

महादेव का पाशुपतास्त्र

पाशुपतास्त्र को भी भोलेनाथ के प्रमुख हथियारों में से एक माना जाता है। तीर के समान बनावट वाले इस हथियार को धनुष के प्रयोग से चलाया जाता था। कुंतिपुत्र अर्जुन के् पास यह हथियार था, लेकिन जनहित में कभी इसका प्रयोग नहीं किया।