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ठेके पर चल रहा खरीद केंद्र ,50 किलो के बाद भी मिल रही 48 किलो की रसीद

ठेके पर चल रहा गेहूं खरीद केन्द्र ,50 किलो के बाद भी मिल रही 48 किलो की रसीद

छतरपुर कोरोना महामारी के बढ़ते प्रकोप से देश में लॉक डाउन को आगे तो बढ़ाया जा रहा है लेकिन वही अब लोगों की आर्थिक स्थिति खराब होने होने के बाद रोजी रोटी पर भी संकट मड़रा रहा है।

मामला छतरपुर रोड कामता नाथ वेयर हाउस का है जहाँ गेहूं खरीद केन्द्र को केन्द्र प्रभारी ने ठेके पर निजी हाथों में सौंप दिया है। कई दिनों से केंद्र प्रभारी लापता है और केंद्र का जिम्मा प्राइवेट लोगों के हाथों में है। दबंग समिति प्रबंधक गौरीशंकर अरजरिया अवैध तरीके से भर्ती करके अपने दामाद आकाश अवस्थी को केंद्र प्रभारी बना दिया गया है। जिससे वहां मनमाने तरीके से तुलाई करके किसानों की बजाय बड़े व्यापारियों से गेहूं खरीदने का काम प्राथमिकता से किया जा रहा है। यह मनमानी किसानों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है ।

खरीद केन्द्र प्रभारी कोरोना काल में अपने घर में आराम फरमा रहे

कोरोना काल में गेहूं खरीद तेजी से करने के लिए जिला सहकारी बैंक महाराजपुर के अंतर्गत सेवा सहकारी समिति टटम में तीन गेहूं खरीद केंद्र बनाए गए हैं। इनमें टटम, खिरवा एवं महाराजपुर में कामतानाथ वेयरहाउस में बने केन्द्र पर गेहूं की खरीद की जा रही है। खरीद केन्द्र प्रभारी कोरोना काल में अपने घर में आराम फरमा रहे हैं और उन्होंने खरीदी केंद्र को गांव के कुछ लोगों को ठेके पर दे दिया है। निजी ऐजेंसी इस केन्द्र पर मनमाने तरीके से गेहूं की खरीद कर रही है।

48 से 50 किलो होने के बावजूद दे रहे 48 किलो गेहूं की रसीद

कामतानाथ वेयरहाउस पर मौजूद आकाश अवस्थी जो खुद को कंप्यूटर ऑपरेटर बताता है उसका कहना है कि 2 दिन से केंद्र प्रभारी यहां नहीं आए हैं। किसानों ने बताया कि खरीद में इस कदर मनमानी की जा रही है कि उसका गेहूं तौल में 48 क्विंटल 50 किलो होने के बावजूद उसे केवल 48 क्विंटल गेहूं की रसीद दी गई हैं। इस बारे में कंप्यूटर ऑपरेटर से कहा गया तो वह बदसलूकी पर उतारू हो गया। ऐसे ही कई किसानों ने यहां मनमाने तरीके से तुलाई और ठेके पर केन्द्र चलाने वालों पर किसानों से अभद्रता करने के आरोप लगाए हैं। केन्द्र पर गेहूं खुले में रखा है जो पानी में भीग सकता है।

गौर करने वाली बात है कि सहकारिता विभाग के आला अधिकारियों की जानकारी के बावजूद बिना किसी पद के खरीदी केंद्र का जिम्मा देना अपने आप में एक बड़ी बात है। जब मौके पर निरीक्षण के लिए आला अधिकारी आते हैं तो किस बात का निरीक्षण करते हैं जब समीति में कर्मचारी ही नहीं है तो केंद्र किसके हवाले चलाने के लिए दिया जा रहा है।