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Posco : पांच वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के आरोपी को 20 साल की सुनाई सजा

पांच वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के आरोपी को 20 साल की सुनाई सजा

हिसार। {Posco act} देश में दुष्कर्म के मामलो पर रोक लगाने के लिए अदालत की तरफ से आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में एडीजे राजेश कुमार मेहता की अदालत ने हिसार जिले के एक गांव में पांच वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म करने वाले पड़ोसी को 20 साल कैद की सजा सुनाई है। इस मामले में आरोपित मनी को 14 मई को दोषी करार दिया गया था, जिसे बुधवार को सजा सुनाई गई।

Posco : पांच वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के आरोपी  को 20 साल की सुनाई सजा
Posco : पांच वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के आरोपी को 20 साल की सुनाई सजा

यह था मामला

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 22 सितंबर, 2020 को आरोपी अनंग नायक पांच साल की बच्ची को बहला-फुसलाकर  तब अपने घर ले गया, जब वह अपने घर के सामने खेल रही थी। इसके बाद आरोपी ने और बच्ची से दुष्कर्म किया। लोक अभियोजक असीम प्रहराज ने कहा कि लड़की की मां ने उसी रात जी उदयगिरि पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज कराई और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।

महिला थाना पुलिस ने पीड़ित बच्ची की मां की शिकायत पर 12 सितंबर 2022 को केस दर्ज किया था। बच्ची की मां ने पुलिस को बताया था कि वे दोनों बहनें एक ही घर में शादीशुदा हैं। उसकी पांच साल की बेटी व तीन साल का बेटा है। 12 तारीख को करीब तीन बजे दोपहर को उसकी पांच वर्षीय बेटी पड़ोसी मनी के घर खेलने गई थी।

उसने अपनी बहन से कहा कि उसकी बेटी को पड़ोसी के घर से ले आए। जब उसकी बहन उसकी बेटी को लेने गई तो देखा कि मनी उसकी बेटी के साथ दुष्कर्म कर रहा था। उसकी बहन बेटी को घर लेकर आई और बेटी ने सारी घटना के बारे में बताया। इसके बाद वह बच्ची को लेकर महिला थाना पहुंची और शिकायत दी। इसी मामले में अदालत ने मनी को सजा सुनाई है।

16 गवाहों के आधार पर आरोपी दोषी करार

बता दें कि फैसला सुनाने से पहले अदालत ने कम से कम 16 गवाहों के बयान और गवाही के आधार पर साक्ष्यों के साथ नाबालिग के दुष्कर्म का दोषी पाया गया। प्रहराज ने कहा कि अदालत ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कंधमाल को पीड़ित के परिवार को छह लाख रुपये का मुआवजा देने का भी निर्देश दिया है। 

Posco कानून

बच्चे शारीरिक एवं मानसिक रूप से परिपक्व नहीं होते ऐसे में आपराधिक प्रवृति के लोग बच्चों की मासूमियत का फायदा उठाकर बच्चों के यौन-शोषण को अंजाम देते है। देश में बच्चों के यौन-शोषण के बढ़ते मामलों के मद्देनजर सरकार द्वारा पॉक्सो एक्ट (Posco Act) लागू किया गया है जिससे की बाल यौन-शोषण की घटनाओ पर अंकुश लगाया जा सके। पॉक्सो एक्ट का फुल फॉर्म, Protection of Children Against Sexual Offence (प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन अगेंस्ट सेक्सुअल ऑफेंस) है।

जिसे की हिंदी में यौन अपराधों के खिलाफ बच्चों की सुरक्षा के नाम से जाना जाता है। पॉक्सो अधिनियम बच्चों को बाल यौन अपराधों, यौन उत्पीड़न एवं पोर्नोग्राफी के प्रति संरक्षण देने के लिए बनाया गया है जिससे बच्चों के प्रति होने वाले यौन अपराधों को रोका जा सके। Posco Act भारत सरकार द्वारा बनाया गया अधिनियम है जिसके अंतर्गत बच्चों के प्रति होने वाले यौन-शोषण पर प्रभावी अंकुश लगाने एवं बच्चों को यौन-शोषण, यौन उत्पीड़न एवं पोर्नोग्राफी के विरुद्ध संरक्षण हेतु प्रभावी प्रावधान किए गए है। पॉक्सो एक्ट (Posco Act) या पॉक्सो अधिनियम को भारत सरकार के महिला और बाल विकास मंत्रालय द्वारा वर्ष 2012 में अधिनियमित किया गया था .

जिसके अंतर्गत बाल यौन-शोषण, यौन उत्पीड़न एवं पोर्नोग्राफी के विरुद्ध कार्यवाही के लिए कड़े प्रावधान किए गए है। इस अधिनियम के अंतर्गत बाल यौन-शोषण का वर्गीकरण एवं आरोपितों को सजा हेतु कड़े प्रावधानों का वर्गीकरण किया गया है। इस प्रकार Posco Act बच्चों को बाल यौन-शोषण के विरुद्ध संरक्षण हेतु प्रभावी उपाय करता है।

Posco Act, क्या है बच्चों के प्रति यौन अपराध

Posco Act के तहत बच्चों के विरुद्ध यौन अपराधों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान रखा गया है। बच्चो के विरुद्ध यौन अपराधों में बच्चों का यौन-शोषण, यौन उत्पीड़न एवं पोर्नोग्राफी को शामिल किया गया है। Posco Act के तहत बच्चों के साथ अश्लील हरकत करना, उनके प्राइवेट पार्ट्स को छूना या बच्चों से अपने प्राइवेट पार्ट को टच करवाना, बच्चों को अश्लील फिल्म या पोर्नोग्राफिक कंटेंट दिखाना।

बच्चों के शरीर को गलत इरादे से छूना या बच्चों के साथ गलत भावना से की गयी सभी हरकते Posco Act के तहत रेप की श्रेणी में रखी गयी है एवं इन सभी अपराधों में कड़ी सजा का प्रावधान भी किया गया है। अगर आपको अपना नाम पसंद नहीं है तो आप चाहे तो आप अपना कानूनी तौर पर नाम भी बदल सकते है।

क्यों आवश्यक है Posco अधिनियम

बच्चे भगवान का रूप माने जाते है। बच्चों का बाल मन शारीरिक एवं मानसिक रूप से अपरिपक्व होता है ऐसे में वे अपने साथ होने वाली अच्छी या बुरी घटनाओं को बेहतर तरीके से व्यक्त नहीं कर पाते।

समाज में आपराधिक प्रवृति के कुछ लोग बच्चो के इसी बालपन का फायदा उठाते है एवं बच्चों के साथ यौन-शोषण जैसे कुकृत्यों को अंजाम देते है। मासूम बच्चे इन सभी चीजों के बारे में खुलकर नहीं बता पाते परन्तु इन घटनाओ का बच्चों के बाल मन पर गहरा प्रभाव पड़ता है एवं वे अपने जीवन भर इन सभी चीजों से बाहर नहीं आ पाते। सरकार द्वारा बच्चो के प्रति होने वाले बाल यौन-अपराधों पर अंकुश लगाने एवं अपराधियों को कड़ी सजा देने के लिए पॉक्सो अधिनियम लागू किया गया है।

Posco एक्ट का वर्गीकरण

पॉक्सो एक्ट 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के प्रति यौन-अपराधों के प्रति बच्चों को संरक्षण प्रदान करता है। 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चो के प्रति सभी यौन-अपराध पॉक्सो अधिनियम के तहत हैंडल किए जाते है। पोक्सो एक्ट के तहत बच्चों के प्रति होने वाले अपराधों को मुख्यत 2 श्रेणियों में विभाजित किया गया है।

  • 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चो के प्रति यौन अपराध- 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चो के प्रति रेप का आरोप सिद्ध होने पर पोक्सो एक्ट के तहत आजीवन कारावास एवं मृत्युदंड का प्रावधान है।
  • 12 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चो के प्रति यौन अपराध- 16 वर्ष तक के नाबालिक बच्चो के प्रति यौन आरोप सिद्ध होने पर न्यूनतम 10 वर्ष एवं अधिकतम 20 वर्ष की कड़ी कैद का प्रावधान रखा गया है।

Posco अधिनियम में मुख्य बदलाव

वर्ष 2012 में पारित Posco अधिनियम में वर्तमान सरकार द्वारा नवीन बदलावों के माध्यम से इसे और भी कठोर बनाया गया है। पहले जहाँ पॉक्सो अधिनियम में सिर्फ नाबालिक लड़कियों के प्रति होने वाले यौन अपराधों को पॉक्सो अधिनियम के तहत रखा जाता था।

वही अब इस अधिनियम में नाबालिक लड़को (Minor Boy) के प्रति होने वाले यौन-अपराधों को भी Posco एक्ट के तहत शामिल किया गया है। पहले नाबालिक लड़कों के प्रति होने वाले यौन-अपराधों के लिए प्रभावी कानून नहीं था। परन्तु अब इन केसेस को भी पॉक्सो एक्ट में शामिल किया गया है। साथ ही 12 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों के प्रति रेप के आरोपी को भी पोक्सो एक्ट में फाँसी की सजा का प्रावधान किया गया है।

Posco एक्ट के प्रावधान

  • 18 वर्ष से कम आयु के सभी बच्चों के यौन-अपराधों को Posco एक्ट के तहत संचालित किया जायेगा एवं अपराधी के दोषी साबित होने पर पॉक्सो एक्ट के तहत सजा का प्रावधान है।
  • भारतीय दंड संहिता 1860 के तहत सहमति से शारीरिक सम्बन्ध बनाने की उम्र 16 वर्ष से बढ़ाकर 18 वर्ष की गयी है।
  • 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की का विवाह होने पर जबरदस्ती शारीरिक सम्बन्ध बनाने को पोक्सो के तहत अपराध की श्रेणी में रखा गया है।
  • Posco के तहत सभी मामलो की सुनवाही विशेष अदालत में की जाएगी। साथ ही पीड़ित बच्चे को माता-पिता या चुने गये अभिभावक के साथ रखा जायेगा। सभी सम्बंधित कार्यवाही को कैमरे में भी रिकॉर्ड किया जायेगा।
  • पीड़ित बच्चे के दिव्यांग, शारीरिक या मानसिक रूप से अक्षम होने पर अदालत द्वारा अनुवादक, दुभाषिये या विशेष शिक्षक की सहायता ली जाएगी एवं संबधित कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग आवश्यक है।
  • बाल यौन-अपराध से सम्बंधित केस आने पर पुलिस द्वारा पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया जायेगा एवं इससे सम्बंधित सूचना बाल कल्याण समिति (CWC) को 24 घंटे के अंदर देनी होगी।
  • Posco के तहत पीड़ित बच्ची की मेडिकल जांच सिर्फ महिला चिकित्सक द्वारा सम्पन की जाएगी एवं सिर्फ दर्दरहित जाँचो को ही इसमें शामिल किया जायेगा। साथ ही यह जांच बच्ची के अभिभावक एवं विश्वसनीय व्यक्ति के देखरेख में की जाएगी।

POCSO अधिनियम की कुछ महत्त्वपूर्ण बातें

  • लिंग-तटस्थ प्रकृति:
    • अधिनियम चिह्नित करता है कि बालक एवं बालिकाएँ दोनों ही यौन शोषण के शिकार हो सकते हैं और यह, चाहे पीड़ित किसी भी लिंग का हो, ऐसे कृत्यों को अपराध मानता है।
    • यह इस सिद्धांत के अनुरूप है कि सभी बच्चों को यौन दुर्व्यवहार एवं शोषण से सुरक्षा का अधिकार प्राप्त है और कानूनों को लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं करना चाहिये।
    • हालाँकि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने पीड़ित बालक और बालिकाओं पर अलग-अलग डेटा प्रकाशित नहीं किया है, छत्तीसगढ़ में पाया गया कि POCSO के प्रत्येक 1,000 मामलों में पीड़ित बालकों की संख्या लगभग आठ थी (0.8%)।
      • यह दर्शाता है कि बालकों का यौन शोषण भी एक गंभीर मुद्दा है जो काफी हद तक रिपोर्ट नहीं की जाती है और अधिनियम द्वारा इसे भी संबोधित करने का प्रयास किया गया है।
  • मामलों की रिपोर्टिंग में आसानी:
    • न केवल व्यक्तियों द्वारा बल्कि संस्थानों द्वारा भी बच्चों के यौन शोषण के मामलों की रिपोर्ट करने के लिये अब पर्याप्त सामान्य जागरूकता पाई जाती है, जहाँ मामलों की गैर-रिपोर्टिंग को भी Posco अधिनियम के तहत एक विशिष्ट अपराध की श्रेणी में रखा गया है। इससे बच्चों के विरुद्ध अपराधों को छिपाना अब तुलनात्मक रूप से कठिन हो गया है।
  • विभिन्न शब्दों की स्पष्ट परिभाषा:
    • अधिनियम के तहत चाइल्ड पोर्नोग्राफी सामग्री के भंडारण को एक नया अपराध बनाया गया है।
    • भारतीय दंड संहिता में मौजूद ‘किसी महिला के शील को भंग करना’ (Outraging Modesty Of A Woman) की अमूर्त परिभाषा के विपरीत इस अधिनियम में ‘यौन दुर्व्यवहार’ के कृत्य को स्पष्ट शब्दों में (न्यूनतम सज़ा में वृद्धि के साथ) परिभाषित किया गया है।

आगे की राह

  • पर्याप्त संसाधन:
    • सरकार को Posco संबंधी मामलों से संलग्न जाँच एजेंसियों को धन और कर्मियों जैसे पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराने चाहिये। इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि मामले की जाँच समयबद्ध और कुशल तरीके से की जाए।
  • जाँच अधिकारियों के लिये प्रशिक्षण:
    • Posco मामलों का प्रबंधन करने वाले जाँच अधिकारियों को उचित प्रशिक्षण प्रदान किया जाना चाहिये। इसमें साक्ष्य एकत्र करने एवं संरक्षित करने, बाल पीड़ितों एवं गवाहों के बयान लेने और Posco अधिनियम की कानूनी आवश्यकताओं की पूर्ति करने हेतु उचित तकनीकों पर प्रशिक्षण प्रदान करना शामिल हो सकता है।
  • Posco मामलों के लिये विशेष न्यायालय:
    • Posco मामलों के लिये विशेष न्यायालयों की स्थापना से यह सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है कि मामलों को त्वरित गति और कुशलता से संभाला जाएगा। इससे सुनवाई की प्रक्रिया में तेज़ी लाने में भी मदद मिलेगी, जो पीड़ित और उनके परिवार के लिये महत्त्वपूर्ण हो सकता है।
  • समयबद्ध चिकित्सकीय परीक्षण:
    • हाल ही में यौन संबंध की पुष्टि करने के लिये दुर्व्यवहार की घटना के तुरंत बाद, जितनी जल्दी हो सके, पीड़ित बच्चे की चिकित्सकीय जाँच की जानी चाहिये।
  • जन जागरूकता:
    • Posco अधिनियम, बाल यौन शोषण की रिपोर्टिंग के महत्त्व और बाल पीड़ितों के अधिकारों के संबंध में जन जागरूकता के प्रसार से मामलों की रिपोर्टिंग में वृद्धि और जाँच प्रक्रिया में सुधार लाने में मदद मिल सकती है।
  • अंतर-एजेंसी समन्वय:
    • पुलिस, बाल कल्याण समिति और चिकित्सा पेशेवरों जैसी विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय यह सुनिश्चित करने में मदद कर सकता है कि मामलों को व्यापक एवं समन्वित तरीके से संभाला जाएगा।
  • निगरानी और समीक्षा:
    • सरकार को निगरानी और समीक्षा की एक प्रणाली स्थापित करनी चाहिये ताकि सुनिश्चित हो सके कि मामलों की जाँच Posco अधिनियम के अनुरूप की जा रही और बाल पीड़ितों के अधिकार संरक्षित किये जा रहे हैं।

Poscoके नए नियम

बाल यौन अपराध संरक्षण नियम, 2020:

जागरूकता और क्षमता निर्माण

(Awareness generation and capacity building):

  • केंद्र और राज्य सरकारों को बच्चों के लिये आयु-उपयुक्त (Age-Appropriate) शैक्षिक सामग्री और पाठ्यक्रम तैयार करने के लिये कहा गया है, जिससे उन्हें व्यक्तिगत सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं के बारे में जागरूक किया जा सके।
  • इस संशोधन के तहत शैक्षिक सामग्री के माध्यम से बच्चों के साथ होने वाले लैंगिक अपराधों की रोकथाम और सुरक्षा तथा ऐसे मामलों की शिकायत के लिये चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 जैसे माध्यमों से भी अवगत कराना है।
  • व्यक्तिगत सुरक्षा में बच्चों की शारीरिक सुरक्षा के साथ ही ऑनलाइन मंचों पर उनकी पहचान से संबंधित सुरक्षा के उपायों, भावनात्मक और मानसिक स्वास्थ्य को भी शामिल किया गया है।

अश्लील सामग्री की रिपोर्टिंग

(Reporting of pornographic material)

  • इस संशोधन में चाइल्ड पोर्नोग्राफी से जुड़े प्रावधानों को भी कठोर किया गया है। 
  • नए नियमों के अनुसार, यदि कोई भी व्यक्ति चाइल्ड पोर्नोग्राफी से संबंधित कोई फाइल प्राप्त करता है या ऐसे किसी अन्य व्यक्ति के बारे में जानता है जिसके पास ऐसी फाइल हो या वह इन्हें अन्य लोगों को भेज रहा हो या भेज सकता है, उसके संबंध में विशेष किशोर पुलिस इकाई या साइबर क्राइम यूनिट (cybercrime.gov.in) को सूचित करना चाहिये। 
  • नियम के अनुसार, ऐसे मामलों में जिस उपकरण (मोबाइल, कम्प्यूटर आदि) में पोर्नोग्राफिक फाइल रखी हो, जिस उपकरण से प्राप्त की गई हो और जिस ऑनलाइन प्लेटफार्म पर प्रदर्शित की गई हो सबकी विस्तृत जानकारी दी जाएगी।

‘बाल संरक्षण नीति’

(Child Protection Policy):

  • नए नियमों के तहत राज्य सरकारों को बाल उत्पीड़न के खिलाफ “शून्य-सहिष्णुता” के सिद्धांत पर आधारित एक ‘बाल संरक्षण नीति’ (Child Protection Policy) तैयार करने के निर्देश दिये गए हैं। 
  • राज्य के ऐसे सभी संस्थानों, संगठनों या अन्य कोई भी एजेंसी जो बच्चों के साथ काम करती हो, उनके द्वारा सरकार की इन नीतियों का अनुसरण किया जाएगा।

source : dristi IAS, crpfindia.com

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