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पटना जेल से लेकर तिहाड़ जेल तक पहुंचे थे पप्पू यादव

17 साल से ज्यादा समय जेल में बिता चुके हैं यादव

बिहार. पप्पू यादव का नाम सुनते ही आमतौर पर लोगों के मन में एक बाहुबली की छवि बनती है। बिहार के मधेपुरा सीट से लोकसभा सांसद रहे पप्पू यादव हमेशा अपने बयानों को लेकर सुर्खियां बटोरते रहे हैं।  बाहुबली से पॉलिटिक्स में आने वाले पप्पू को किसी जमाने में लालू की राजनीतिक विरासत का उत्तराधिकारी माना जाता था। लेकिन, आज पप्पू  यादव लालू और उनकी पार्टी राजद के लिए ‘बैड एलिमेंट’ बन चुके हैं।

17 साल से ज्यादा समय जेल में बिता चुके हैं यादव

बिहार के मधेपुरा से निर्दलीय सांसद रहे पप्पू यादव ने अपनी बिहार से तिहाड़ की यात्रा यानी पटना की जेल से लेकर दिल्ली के तिहाड़ जेल तक का सफर तय किया हैं। पप्पू यादव संगीन आरोप में 17 साल से अधिक समय जेल में बिता चुके हैं। पप्पू यादव ने अपने करियर की शुरूआत विधायक के तौर पर की थी। पप्पू यादव ने 1990 में  मधेपुरा से विधानसभा का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। उसके बाद उन्होंने पूर्णिया से 10वीं लोकसभा के लिए चुनाव लड़ा और वहां भी जीत हासिल की। इसके बाद यादव कई पार्टियों से जुड़े वो आरजेडी, समाजवादी पार्टी और लोक जनशक्ति पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़े और जीते भी।

आरजेडी से निकाला तो खुद की राजनितिक पार्टी बनाई  

यादव ने साल 1991, 1996, 1999 और 2004 में लोकसभा चुनाव जीता जिसके बाद 2015 में आरजेडी से पप्पू यादव को निकाल दिया गया था। राजद से निकाले जाने के बाद पप्पू यादव ने अपनी नई पार्टी बनाई और नाम रखा जन अधिकार पार्टी।

बेटे को बड़ा किक्रेटर बनाना चाहते हैं यादव

पप्पू यादव के परिवार में उनके माता-पिता के अलावा एक छोटी बहन हैं, जो डॉक्टर हैं। उनके बहनोई फर्रुखाबाद में कई मेडिकल कॉलेज चलाते हैं। पप्पू का एक बेटा और एक बेटी है। बेटे सार्थक रंजन दिल्ली अंडर 19 क्रिकेट टीम के उप कप्तान हैं। जबकि उनकी बेटी दिल्ली में पढ़ती हैं। पप्पू को भरोसा है कि उनका बेटा 1 दिन बड़ा क्रिकेटर बनेगा।

एंबुलेंस पकड़ाकर फिर चर्चा में आए यादव

हाल ही में पप्पू यादव काफी चर्चा में हैं, उन्होंने सारण लोकसभा से सांसद राजीव प्रताप रूडी की सांसद निधि से खरीदी गई दो दर्जन से अधिक एम्बुलेंस खोज निकाली थीं। जिसके बाद से बिहार सरकार ने उन्हें जेल में बंद कर दिया था। सोशल मीडिया पर पप्पू यादव को देश के लोगों का काफी समर्थन मिला था।