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मध्यप्रदेश में इसी साल से राष्ट्रीय शिक्षा नीति की जाएगी लागू

नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि जिस तरह प्रदेश ने बीते वर्षों में बिजली, पानी और कृषि के क्षेत्र में विकास के नए रिकॉर्ड बनाए हैं, उसी तरह अब स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में श्रेष्ठ उपलब्धियां प्राप्त करने के प्रयास होंगे।

मध्यप्रदेश में इसी साल से राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की जाएगी। इसका ऐलान मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव ने किया है। पत्रकारों से चर्चा के दौरान यादव ने कहा कि इस वर्ष महाविद्यालयों में 177 डिप्लोमा एवं 282 सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर विभाग द्वारा बनाई टास्क फोर्स ने अन्य राज्यों की उच्च शिक्षा व्यवस्था का अध्ययन किया और राष्ट्रीय शिक्षा नीति की कार्य योजना बनायी है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा को अधिक जॉब ओरिएंटेड बनाने के लिए सर्टिफिकेट, डिप्लोमा एवं व्यावसायिक पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जा रहे हैं।

उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि इस वर्ष आधार पाठयक्रम में योग एवं ध्यान के पाठ्यक्रम भी जोड़े गए हैं। इसके अलावा 79 विषयों के प्रथम वर्ष के पाठ्यक्रम तैयार किये गए हैं, जिसमें विद्यार्थियों को वैकल्पिक विषय चुनने का अवसर दिया जाएगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप सर्टिफिकेट 1 साल, डिप्लोमा 2 साल और 3 साल में डिग्री सहित ‘मल्टीपल एंट्री, मल्टीपल एग्जिट सिस्टम और चॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) भी लागू किया जा रहा है.

134 शासकीय महाविद्यालयों में म.प्र.\भोज मुक्त विश्वविद्यालय के स्टडी सेंटर खोले गए हैं

यादव ने कहा कि वर्ष 2020-21 में 12वीं कक्षा में मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल, ओपन बोर्ड और सीबीएसई से लगभग प्रदेश में 8.23 लाख स्टूडेंट्स पास हुए हैं। ऐसे में स्टूडेंट्स की संख्या को ध्यान में रखते हुए विभाग ने निजी और शासकीय महाविद्यालयों की सीटों में 25 प्रतिशत वृद्धि की है। इसके अलावा ऐसे स्टूडेंट्स जो नियमित रूप से कॉलेज नहीं आ सकते उन्हें उच्च शिक्षा देने के लिए 134 शासकीय महाविद्यालयों में म.प्र.\भोज मुक्त विश्वविद्यालय के स्टडी सेंटर खोले गए हैं और 84 नए सेंटर प्रस्तावित हैं. साथ ही निजी महाविद्यालयों में भी स्टडी सेंटर खोले जाने के लिए प्रस्ताव विचाराधीन हैं.