//

Mahashivratri 2021: शिव पुराण के वाचन में इन बातों का रखें ध्यान, मिटेंगे दुख, मिलेगी समृद्धि

Start

Mahashivratri 2021: धर्मशास्त्रों में महादेव का बहुत महिमामंडन किया गया है। भोलेनाथ को देवताओं में सर्वश्रेष्ठ और भोला भंडारी कहा गया है। वे भक्तों की आराधना से शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं और मनचाहा वरदान प्रदान करते हैं। अठारह पुराणों मे से दो पुराण भोलेनाथ को समर्पित है। शिवपुराण और लिंगपुराण में महादेव का महिमामंडन किया गया है।

शिवपुराण का है विशेष महत्व

सनातन संस्कृति में शिवपुराण के वाचन और श्रवण का विशेष महत्व बताया गया है। विशेष अवसरों पर शिवपुराण का वाचन और श्रवण करने से सुख-समृद्धि मिलने के साथ अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है। शिवपुराण करने वाले कथावाचक, संत, महात्मा या पंडित को कथा का प्रारंभ करने के एक दिन पहले ही व्रत का संकल्प लेकर क्षौर कर्म कर लेना चाहिए। इसके बाद कथा के समापन तक क्षौर कर्म यानी बाल बनाना, शेविंग करना आदि कार्य नहीं करना चाहिए।

दीक्षा लें और करें ब्रह्मचर्य का पालन

गरिष्ठ अन्न यानी पचने में समस्या देने वाले अन्न का सेवन कर शिवपुराण का श्रवण या वाचन नहीं करना चाहिए। शिवपुराण का श्रवण करने वाले शिवभक्तों को कथा का प्रारंभ होने से पहले गुरु से दीक्षा ग्रहण करनी चाहिए। दीक्षा लेने के बाद शिवभक्त को ब्रह्मचर्य का पालन करना, भूमि पर शयन करना, पत्तल में खाना और रोजाना कथा के समापन पर ही भोजन ग्रहण करना चाहिए। शिवपुराण कथा का व्रत लेने वाले पुरूष को रोजाना एक समय भोजन ग्रहण करना चाहिए। भोजन में जौ, तिल और चावल शामिल होना चाहिए। व्रत लेने वाले को इस अवधि में प्याज, लहसुन, हींग, गाजर, मादक वस्तुओं आदि का पूर्णत; त्याग कर देना चाहिए।

संयमित दिनचर्या का करे पालन

कथा का व्रत रखने वाले को काम और क्रोध और दूसरे व्यसनों का त्याग कर संयमित दिनचर्या का पालन करना चाहिए साथ ही ब्राह्मणों और साधु-संतों की निंदा भी इस अवधि में नहीं करनी चाहिए।
शिवपुराण पुण्यदायी और पापों का क्षमण करने वाली है इसलिए इस कथा का श्रवण गरीब, रोगी, पापी, भाग्यहीन और संतान रहित पुरूष को जरूर करना चाहिए।

कथा के समापन पर एक धार्मिक महोत्सव का आयोजन कर शिव के साथ शिवपुराण की पूजा करना चाहिए। ब्राह्मणों को भोजन करवाकर उनका सम्मान करना चाहिए और यथोचित दक्षिणा देकर विदा करना चाहिए। कथावाचक को भी सम्मान के साथ दान-दक्षिणा देकर विदा करना चाहिए। कथा के समापन पर कम से कम 11 ब्राह्मणो को शहद मिश्रित खीर और स्वादिष्ट पकवानों के साथ भोजन करवाना चाहिए।