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Jyeshta Mas: ज्येष्ठ माह में इन कार्यों की है मनाही, इस देव की करे आराधना, मिटेंगे कष्ट, मिलेगी समृद्धि

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Jyeshta Mas: सनातन संस्कृति में ऋतु, मास, तिथि और त्यौहारों के हिसाब से जीवन को जीने के तरीके बतलाए गए हैं, जिससे इंसान स्वस्थ हो और बेहतर जीवन जी सके। बारह मासों में किस तरह का भोजन करना चाहिए इस संबंध में धर्मशास्रों में विशेष व्यवस्था की गई है। इसी तरह ज्येष्ठ मास में भीषण गर्मी का प्रकोप होता है इसलिए शरीर को ठंडी तासीर के और शीघ्र पचने वाले खाद्य पदार्थों को खाने की सलाह दी जाती है।

खानपान में रखें संयम

27 मई से ज्येष्ठ माह का प्रारंभ होगा जो 24 जून 2021 तक रहेगा। हिन्दू कैलेंडर का तीसरा मास ज्येष्ठ मास कहलाता है। ज्येष्ठ मास में किस तरह से दिनचर्या व्यतीत करना चाहिए और व्यक्तिी को अपना खानपान कैसा रखना चाहिए, इस संबंध में प्राचीन ग्रंथों में दोहों के माध्यम से बतलाया गया है।

चौते गुड़, वैशाखे तेल, जेठ के पंथ, अषाढ़े बेल।
सावन साग, भादो मही, कुवांर करेला, कार्तिक दही।

अगहन जीरा, पूसै धना, माघै मिश्री, फाल्गुन चना।
जो कोई इतने परिहरै, ता घर बैद पैर नहिं धरै।।।

।।चैत चना, बैसाखे बेल, जैठे शयन, आषाढ़े खेल, सावन हर्रे, भादो तिल।
कुवार मास गुड़ सेवै नित, कार्तिक मूल, अगहन तेल, पूस करे दूध से मेल।

माघ मास घी-खिचड़ी खाय, फागुन उठ नित प्रात नहाय।।

बेल फल का करें सेवन

इसके अनुसार ज्येष्ठ मास में दोपहर में बाहर घूमना और खेलना मना है। इस महीने में गर्मी काफी तेज रहती है इसलिए बाहर तेज धूप में ज्यादा घूमना-फिरना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इसलिए ज्यादातर समय घर पर व्यतीत करना चाहिए। ज्येष्ठ मास में बेल के फल का सेवन फायदेमंद माना जाता है, लेकिन लहसुन, राईं, गर्मी करने वाली सब्जियां और फल को नहीं खाना चाहिए। इस मास मेंंजल का ज्यादा महत्व होता है इसलिए पर्याप्त मात्रा में जल का सेवन करना चाहिए। इस मास में जल के दान और जलसेवा का भी काफी महत्व है।

जल का करें दान

इस महीने जल से संबंधित दो त्यौहार गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी को मनाया जाता है। इन दिनों जलदान का बड़ा महत्व है और जल के दान से पुण्यफल की प्राप्ति होती है। घाघ के मतानुसार इस मास में जो व्यक्ति दिन में शयन करता है व ह रोग को आमंत्रित करता है। इस मास में बैंगन के सेवन का भी निषेध है। इससे शारीरिक पीड़ा होती है और यह संतान के लिए शुभ नहीं होता है। ज्येष्ठ मास में ज्येष्ठ पुत्र या पुत्री का विवाह करना भी शुभ नहीं माना गया है। इस मास में अकाल मृत्यु के निवारण के लिए तिल का दान करना चाहिए। इस मास में हनुमानजी की प्रभु श्रीराम से भेंट हुई थी। इसीलिए इस माह में हनुमानजी की पूजा करने से विशेष लाभ की प्राप्ति होती है।

महाभारत के अनुशासन पर्व के अनुसार ज्येष्ठ माह में एक समय भोजन करना वाला व्यक्ति आरोग्य को प्राप्त करता है।

ज्येष्ठामूलं तु यो मासमेकभक्तेन संक्षिपेत्।
ऐश्वर्यमतुलं श्रेष्ठं पुमान्स्त्री वा प्रपद्यते।