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Jagannath Rath Yatra 2021: 16 बार हमलावरों ने ध्वस्त किया जगन्नाथ मंदिर और हर बार पाया भव्य स्वरूप

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Jagannath Rath Yatra 2021। जगन्नाथ मंदिर हिन्दू धर्म की आस्थाी का केंद्र है।यह मंदिर पर कई बार आक्रमणकारियों ने आक्रमण किए। आक्रमण कर हमलावरों ने इस मंदिर को भारी क्षति पहुंचाई, लेकिन इसके बावजूद विश्वप्रसिद्ध चारधामों में से एक जगन्नाथ मंदिर को ले राजा-महाराजाओं ने फिर से भव्य स्वरूप प्रदान किया। मंदिर के धार्मिक महत्व, भक्तों की आस्था, उसमें समाए चमत्कार और मंदिर से जुड़ी मान्यताओं आदिकाल से चले आ रहे हैं।

सुल्तान इलियास शाह ने किया था पहला हमला

मंदिर पर पहला हमला सन 1340 में हुआ था, उस वक्त बंगाल के सुल्तान इलियास शाह ने जगन्नाथ मंदिर पर हमला कर इसको नष्ट कर दिया था। उस समय ओडिशा, उत्कल प्रदेश के नाम से पहचाना जाता था। पराजित होने से पहले उत्कल महाराज नरसिंह देव तृतीय ने आक्रमणकारी इलियास शाह से मंदिर और प्रजा की रक्षा के लिए घनगोर युद्ध किया था। जीत के बाद इलियास शाह के सैनिकों ने मंदिर परिसर में काफी खूनखराबा किया था, लेकिन इसके बावजूद सम्राट नरसिंह देव जगन्नाथ की मूर्तियों को बचाने में सफल रहे थे, उस वक्त उनके आदेश पर मूर्तियों को छुपा दिया गया था।

फिरोज शाह तुगलक ने किया था दूसरा हमला

मंदिर पर दूसरा आक्रमण 1360 में दिल्ली सल्तनत के सुल्तान फिरोज शाह तुगलक ने किया था। इस आक्रमण में भी मंदिर को काफी नुकसान पहुंचा था। जगन्नाथ मंदिर पर तीसरा आक्रमण 1509 में बंगाल के सुल्तान अलाउद्दीन हुसैन शाह के सेनापति इस्माइल गाजी ने किया था। आक्रमण की खबर मिलते ही मंदिर के पंडे-पुजारियों ने मूर्तियों को मंदिर से दूर ले जाकर बंगाल की खाड़ी में स्थित चिल्का झील के एक द्वीप में छुपा दिया था। उस समय के सूर्यवंशी राजा प्रताप रुद्रदेव ने सुल्तान की सेना को हुगली में हरा दिया था।

अफगान काला पहाड़ ने किया था चौथा आक्रमण

1568 में मंदिर पर चौथा आक्रमण हुआ था। अफगान हमलावर काला पहाड़ ने मंदिर को काफी नुकसान पहुंचा था। इस अक्रमण के वक्त भी मूर्तियों को चिल्का झील में स्थित द्वीप में छुपा दिया गया था। इस हमले के बाद ओडिशा मुस्लिम शासन के हाथों में चला गया था। मंदिर पर पांचवा आक्रमण 1592 में ओडिशा के सुल्तान ईशा के बेटे उस्मान और कुथू खान के बेटे सुलेमान ने किया था। इन्होंने भक्तों का बेरहमी से कत्ल किया, मूर्तियों को अपवित्र किया और मंदिर की बेशुमार संपदा को लूट लिया था।

हाशिम खान ने किया मंदिर पर सातवां हमला

सन 1601 में बंगाल के नवाब इस्लाम खान के सेनापति मिर्जा खुर्रम ने जगन्नाथ मंदिर पर छठा अक्रमण किया था। इस समय देव मूर्तियों को पुजारियों ने नाव के जरिए भार्गवी नदी को पारकर कपिलेश्वर में छुपा दिया था। इसके बाद मूर्तियों को दूसरे स्थान पर भी ले जाया गया था। मंदिर पर सातवां आक्रमण ओडिशा के सूबेदार हाशिम खान ने किया था । इस बार भी हमले की खबर मिलते ही मूर्तियों को 50 किलोमीटर दूर स्थित खुर्दा के गोपाल मंदिर में छुपा दिया गया था। इसके बादमूर्तियों को वापस 1608 में जगन्नाथ मंदिर में स्थापित किया गया था।

राजा कल्याणमण ने किया था हमला

मंदिर पर आठवां आक्रमण हाशिम खान के एक हिंदू जागीरदार ने किया था। इस वक्त मंदिर में मूर्तियां नहीं थी इसलिए मंदिर को लूटने के बाद उसको किले में बदल दिया गया था। मंदिर पर नौवां आक्रमण 1611 में मुगल बादशाह अकबर के नवरत्नों में शुमार राजा टोडरमल के बेटे राजा कल्याणमल ने किया था। इस समय पुजारियों ने मूर्तियों को बंगाल की खाड़ी में स्थित एक द्वीप में छुपा दिया था। मंदिर पर दसवां हमला भी राजा कल्याणमल ने कर मंदिर को काफी लूटा था।

सेनापति मुकर्रम खान ने किया था 11वां आक्रमण

मंदिर पर 11वां आक्रमण 1617 में मुगल सम्राट जहांगीर के सेनापति मुकर्रम खान ने किया था। इस समय गोबापदार नामक स्थान पर मूर्तियों को छुपा दिया गया था। 12वां आक्रमण 1621 में ओडिशा के मुगल गवर्नर मिर्जा अहमद बेग ने किया था। मुगल सम्राट शाहजहां के दौरे के वक्त भी मंदिर की मूर्तियों को छुपा दिया गया था। मंदिर पर 13वां आक्रमण 1641 में ओडिशा के मुगल सूबेदार मिर्जा मक्की ने किया था। मंदिर पर 14वां आक्रमण भी मिर्जा मक्की ने ही किया था। जगन्नाथ मंदिर पर 15वां आक्रमण अमीर फतेह खान ने किया था और उसने मंदिर के रत्नभंडार को लूट लिया।

औरंगजेब के आदेश पर हुआ था 1692 में हमला

मंदिर पर 16वां हमला मुगल सम्राट औरंगजेब के आदेश पर 1692 में किया गया था। औरंगजेब ने मंदिर को पूरी तरह ध्वस्त करने का फरमान जारी किया था। उस वक्त ओडिशा का नवाब इकराम खान था, जो मुगलों के अधीन था। उसने औरंगजेब के हुकुम की तामील करते हुए जगन्नाथ मंदिर पर हमला कर भगवान का सोने के मुकुट लूट लिया था। मंदिर की मुर्तियों को आक्रमणकारियों से बचाने के श्रीमंदिर नामक स्थान के बिमला मंदिर में छुपाया गया था। 17वां हमला 1699 में मुहम्मद तकी खान ने किया था। इस समय भी मूर्तियों को छुपाया गया था और एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानातरित करते हुए कुछ समय के लिए हैदराबाद भी ले जाया गया था।

इस तरह से हमलावरों के नापाक इरादों को नाकाम करने के लिए 144 साल तक भगवान जगन्नाथ मंदिर के बाहर रहे।