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इंदौर के ताज में जड़ा एक और रत्न, देश के पहले वाटर प्लस शहर के खिताब से नवाजा गया

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इंदौर। स्वच्छता के क्षेत्र में देश में लगातार चार बार नंबर वन रहने वाले इंदौर के ताज में एक और नगीना जुड़ गया है। केंद्र सरकार ने इंदौर को वाटर प्लस के खिताब से नवाजा है। इंदौर देश का एकमात्र शहर है, जिसके पास वाटर प्लस का तमगा है। इसके बाद स्वच्छ सर्वेक्षण में एक बार फिर इंदौर के नंबर वन आने की आशा प्रबल हो गई है। अब यह बात पूर्णत: संभव होती दिखाई दे रहा है कि इंदौर स्वच्छता का पंच लगाने से कोई नहीं रोक सकता है।

300 करोड़ रुपए में नाला टैपिंग

उल्लेखनीय है कि स्वच्छ सर्वेक्षण 2021 में सबसे कठिन माने जाने वाले वाटर प्लस सर्वे के लिए एक माह पहले केंद्रीय टीम इंदौर पहुंची थी। टीम ने कम्युनिटी टॉयलेट पब्लिक टॉयलेट (सीटीपीटी) के साथ 11 पैरामीटर पर सर्वे किया था। 11 पैरामीटर्स पर करीब 200 लोकेशन देखने के बाद इंदौर को वाटर प्लस सर्टिफिकेट प्राप्त हुआ है। इसके लिए 300 करोड़ रुपए में नाला टैपिंग कर दोनों नदियों और 27 नालों को सीवर मुक्त करने का काम किया गया। शहर के पांच हजार से ज्यादा परिवारों ने 20 करोड़ खर्च कर नाले में सीधे गिरने वाले आउटफॉल को बंद कर ड्रेनेज लाइन में कनेक्शन लिया। केंद्र सरकार ने वाटर प्लस सर्वे के लिए 11 पैरामीटर तय कर कुल 1800 नंबर रखे हैं। इनमें वाटर प्लस के 700 नंबर हैं। पिछली बार इंदौर को 500 नंबर मिले थे।

सर्टिफिकेट मिला, अब सेवन स्टार का दावा पक्का

अब तक वाटर प्लस सर्टिफिकेट देश में किसी भी शहर को नहीं मिला था, लेकिन अब यह इंदौर को मिल चुका है, जिसके चलते सेवन स्टार का दावा लगभग पक्का होता दिख रहा है।

यह थे 11 पैरामीटर

स्लम एरिया, रहवासी इलाके, व्यावसायिक प्रतिष्ठान, सार्वजनिक स्थान, ट्रांसपोर्ट हब, बड़ी कंस्ट्रक्शन साइट, औद्योगिक इकाइयां, सड़कें और गलियां, जल स्रोत, डिकेंटिंग-डिस्लजिंग गाड़ियां, रिसाइकिलिंग और रीयूज पॉइंट।

सर्वे में यह देखा और दिया खिताब

  • शहर के सभी घरों का सीवरेज ड्रेनेज लाइन या सेप्टिक टैंक से जुड़ा होना चाहिए।
  • नालों और नदी में किसी प्रकार का सूखा कचरा तैरता नजर नहीं आना चाहिए।
  • सीवरेज वाटर का ट्रीटमेंट कर कम से कम 25 प्रतिशत पानी सड़क धुलाई, गार्डन, खेती सहित अन्य कार्यों में उपयोग किया जाना चाहिए।
  • सभी ड्रेनेज के ढक्कन बंद होने चाहिए। ड्रेनेज का पानी सड़क पर नहीं आना चाहिए।
  • चैंबर और मेन होल साफ होने चाहिए।
  • ड्रेनेज लाइनें चोक नहीं होनी चाहिए।
  • नगर निगम के एप पर आने वाली ड्रेनेज की शिकायतों का तुरंत समाधान होना चाहिए।