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Independence Day 2021: पाकिस्तान को बनाने की 9 योजनाएं बनी थी, लेकिन अस्तित्व में ऐसे आया था

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Independence Day 2021: मुल्क में सांप्रदायिकता का षडयंत्र काफी पहले से रचा जा रहा था। धर्माधता की आग धीरे-धीरे पूरे देश को अपने आगोश में लेती जा रही थी। ऐसे में देश को धर्म के आधार पर बांटकर दो मुल्क बनाने का सपना देखा गया। सबसे पहले चौधरी रहमत अली ने पाकिस्तान का विचार पेश किया। इसके बाद 9 प्लान पाकिस्तान के निर्माण के पेश किए गए, लेकिन जब पाकिस्तान अस्तित्व में आया तो उसका स्वरूप इन सभी योजनाओं से अलहदा था। अब बात करते हैं उन लोगों की और उनकी पाकिस्तान बनाने कि योजनाओं की।

चौधरी रहमतअली का प्लान

पाकिस्तान का विचार 1930 में सबसे पहले कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के छात्र चौधरी रहमत अली के दिमाग में आया। रहमत अली ने इसकी रूपरेखा 28 जनवरी 1933 में बनाई। रहमत अली ने पाकिस्तान का जहरीला बीज इंग्लैंड की सरजमी पर बोया और उसकी विषबेल ने हिंदुस्तान को अपने आगोश में लिया। उन्होंने अपनी किताब ‘Now or Never’ में इस बात का खुलासा किया है। रहमत अली ने उत्तर- पश्चिम के मुस्लिम बहुल प्रांतों को मिलाकर पाकिस्तान बनाने की योजना पेश की थी। 1937 में उन्होंने अपनी महत्वाकांक्षाओं का दायरा बढ़ाते हुए असम और बंगाल को मिलाकर बंगस्तान और दक्षिण हैदराबाद को उस्मानिस्तान बनाने का खाका भी तैयार कर लिया।

डॉक्टर सैयद अब्दुल लतीफ का प्लान

हैदराबाद के डॉक्टर सैयद अब्दुल लतीफ को जनवरी 1936 में लाहौर में मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान कीयोजना का काम सौंपा। सैयद अब्दुल लतीफ ने पाकिस्तान के लिए चार मण्डल बनाए। पहले में सिंध, बिलोचिस्तान, कश्मीर, खैरपुर, भावलपुर शामिल थे। इन इलाकों से हिंदुओं और सिखों को राजा और प्रजा सहित हटाने की योजना थी। दूसरा दिल्ली और लखनऊ, जिसमें संयुक्त प्रांत और बिहार के मुसलमान बसेंगे। यह भी प्रावधान था कि हिंदू यदि अपने तीर्थ स्थलों में चाहे तो रह सकते हैं। उत्तर-पूर्व मण्डल में बंगाल और आसाम को शामिल किया गया था और इन इलाकों से हिंदूओं को निकालकर बिहार में स्थानांतरित करने की योजना थी। चौथे में हैदराबाद और मद्रास शामिल था वहां से भी हिंदूओं को हटने की योजना थी। इसके अलावा हिंदूस्तान की मुस्लिम रियासतें जैसे भोपाल से लेकर जावरा और टोंक तक शामिल है वह भी पाकिस्तान का हिस्सा होंगी और वहां से भी हिंदूओं को दूसरी जगह जाना होगा।

मिस्टर पंजाबी की योजना

तीसरी योजना मिस्टर पंजाबी ने अपनी बुक ‘कॉन्फिडिरेसी ऑफ इंडिया’ मे भारत को पांच भागों में बांटने की योजना पेश थी। इन्डस फेडरेशन से लेकर डेक्कन फेडरेशन तक यानी बिलोचिस्तान से लेकर बस्तर और मद्रास तक का विभाजन की योजना तैयार की गई थी।

मौलवी साहब की योजना

कलकत्ते के एक मौलवी ने चौथी योजना तैयार कि थी। जिसके अनुसार उत्तर प्रदेश और बिहार के हिंदूओं को वहां से हटाकर पश्चिम में भेज दिया जाए और फिर अफगानिस्तान से आसाम तक और हिमालय से विन्धाचल तक पाकिस्तान का निर्माण किया जाए। इस योजना के तहत मुल्क एक खलिफा की सरपरस्ती में रहे और दक्षिण के मुसलमान उत्तर में आकर बस जाएं। इस योजना को ‘पाकिस्तान खिलाफत’ का नाम दिया गया।

सर सिकंदर हयात खान की योजना

पंजाब के प्रधानमंत्री सर सिकंदर हयात खान ने पांचवी योजना का खाका तैयार किया था। उन्होंने 1935 में अपनी किताब ‘ आऊटलाइन ऑफ स्कीम ऑफ इंडियन फेडरेशन ‘ में हिंदुस्तान के सात भाग बताए।, लेकिन उन्होंने अपनी योजना में राजपूताना की जैसलमेर और बीकानेर रियासतों को शामिल कर लिया था।

सर फिरोज खां नून की योजना

लन्दन में भारत के भूतपूर्व हाईकमिश्नर और वायसराय की कार्यकारिणी के सदस्य सर फिरोज खां नून ने छटी योजना पेश की। इस योजना में पाकिस्तान का पांच भागों मे निर्माण की बात कही जिसमें पूरे भारत के मुस्लिम बहुल इलाके शामिल थे।

सैयद जफरुल हसन और मोहम्मद अफजल हुसैन कादरी की योजना

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के सैयद जफरुल हसन और मोहम्मद अफजल हुसैन कादरी नाम के दो प्रोफेसरों ने सातवी योजना का खाका तैयार किया था। पाकिस्तान की इस योजना में 60 फीसद मुस्लिम आबादी वाले पंजाब, सिंध, सीमा प्रांत, बिलोचिस्तान, कश्मीर, कपूरथला, चित्राल, मलेरकोटला, 8 फीसद मुस्लिम आबादी वाले बंगाल,पुर्णिया, सिलहट, 28 फीसद मुस्लिम आबादी हैदराबाद, बरार, कर्नाटक, दिल्ली, मेरठ, अलीगढ़, रुहेलखंड और 27 फीसद मुस्लिम आबादी वालेमलाबार दक्षिण कनाराऔर पूर्वोत्तर पाकिस्तान को छोड़कर भारत का शेष भाग शामिल था।

चौधरी रहमत अली की 1942 की योजना

चौधरी रहमत अली ने एक बार फिर 1942 में पाकिस्तान की नई योजना पेश की और कहा कि भारत का नाम दीनिया और मुस्लिम एशिया का नाम पाकेशिया रखा जाए। उन्होने अपनी नई योजना में अजमेर- मेवाड़ के क्षेत्र को मुईनस्तान के नाम से, लखनऊ-अवध के इलाके को हैदरस्तान, भोपाल को सिद्कीस्तान, बिहार-उड़ीसा के कुछ भागों को फर्रूकस्तान, मलाबार तट के इलाकों को मोपलास्तान, लंका के पूर्वी और पश्चिमी इलाकों को सफीस्तान और नासरस्तान के नाम से पाकिस्तान के हिस्से में सात भाग और जोड़ दिए।

डॉक्टर ऑम्बेडकर ने भी पाकिस्तान के संबंध में एक किताब ‘थॉट ऑफ पाकिस्तान’ लिखी थी, जिसमें मुस्लिम लीग के दावे का समर्थन किया था और कहा था कि लीगी प्रांतों में 38 प्रतिशत हिंन्दू और सिख रहते हैं उनको आत्मनिर्णय का अधिकार नहीं दिया जाए, जबकि वह 25 फीसद मुसलमानों के आत्मनिर्णय के अधिकार का समर्थन करते थे।