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केरल में मनुष्यों तक कैसे पहुंचा निपाह वायरस? जांच में जुटी विशेषज्ञों की टीम

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नई दिल्ली। केरल में कोरोना वायरस के खतरे के बीच अब निपाह वायरस ने चिंता बढ़ा दी है। केरल के कोझिकोड में निपाह वायरस से 12 साल के एक लड़के की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम वायरस की उत्पत्ति की जांच के लिए जुट गई है। सोमवार को केरल पशुपालन विभाग के उप निदेशक केके बेबी ने कहा कि हमने एक बकरी के नमूने एकत्र किए हैं। जो बच्चों के संपर्क में आया था। रामबूटन के एक पेड़ की भी जांच की गई, क्योंकि उसमें ऐसे फल लगे थे जिन्हें चमगादड़ ने काटा हो सकता है।

बता दें कि कोझिकोड में एक बच्चे की मौत के बाद दो स्वास्थ्यकर्मी भी वायरस से संक्रमित पाए गए हैं। केंद्र की एक स्वास्थ्य टीम ने रविवार को केरल के कोझीकोड जिले का दौरा किया और इलाके से रामबूटन फलों के नमूने एकत्र किए। सरकार के एक बयान के अनुसार, ये सैंपल वायरस के पैदा होने को लेकर जानकारी जुटाने में मदद कर सकते हैं।

जांच में जुटी नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल की टीम

दिल्ली के नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल की टीम ने परिवार और लड़के के करीबी लोगों के साथ बातचीत की और उसके द्वारा खाए गए भोजन और उसके संपर्क में आने वाले जानवरों की पहचान की। लड़के के कम से कम 18 करीबी लोग, मुख्य रूप से रिश्तेदार और स्वास्थ्य कार्यकर्ता, और 150 माध्यमिक संपर्कों की पहचान की गई है और उन्हें क्वारंटाइन में भेज दिया गया है। बाद में दो स्वास्थ्य कर्मियों में निपाह के लक्षण दिखे।

2018 में भी मिला था निपाह वायरस

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, निपाह वायरस का प्रकोप केरल के कोझीकोड और मलप्पुरम जिलों में 2018 में सामने आया था। निपाह वायरस रोग फलों के चमगादड़ों के कारण होता है और संभावित रूप से मनुष्यों के साथ-साथ जानवरों के लिए भी घातक है।