भारतीय रुपये पर एक बार फिर दबाव दिखाई दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में तेजी ने रुपये के लिए मुश्किलें बढ़ाई हैं। 1 अक्टूबर को डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर खुलने का अनुमान लगाया गया था, जबकि हाल के सत्रों में यह 96 रुपये प्रति डॉलर के स्तर के आसपास पहुंच चुका है।

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, इसलिए महंगा कच्चा तेल देश के आयात बिल और महंगाई दोनों पर दबाव डाल सकता है। सरकार की आर्थिक समीक्षा ने भी भू-राजनीतिक तनाव, ऊंची तेल कीमतों और सख्त वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों को अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम के तौर पर रेखांकित किया है।
इस बीच भारतीय शेयर बाजार ने भी 1 अक्टूबर की शुरुआत कमजोरी के साथ की। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में खुले। आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर कच्चे तेल, रुपये की चाल, वैश्विक ब्याज दरों और विदेशी निवेश के रुख पर रहने वाली है।






