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Happy Pongal 2021: चार दिनों तक मनता है पोंगल, जानिए इसकी विशेष परंपराएं

Happy Pongal 2021: पोंगल दक्षिण भारत का एक प्रमुख और विशेष पर्व है। इस पर्व को दक्षिण भारत के ज्यादातर हिस्सों में मनाया जाता है। इसी समय उत्तर भारत में मकर संक्राति और लोहड़ी की धूम रहती है। इस समय सर्दी अपने शबाब पर रहती है और देश में उत्तर से से लेकर दक्षिण भारत तक पर्वों की अनोखी छटा छाई रहती है। पोंगल का पर्व दक्षिण भारत में चार दिनों तक लोग मनाते हैं। आइए जानते हैं पोंगल की विशेष रस्मों के बारे में।

भोगी पोंगल

पोंगल के पहले दिन को भोगी पोंगल कहा जाता हैं। इस दिन लोग देवराज इंद्र की आराधना करते है और इंद्रदेव से बेहतर वर्षा की प्रार्थना करते हैं। भोगी पोंगल के दिन इंद्रदेव को प्रसन्न करने के लिए फल, फूल और मिष्ठान्न समर्पित किए जाते हैं। ब्रह्म मुहूर्त में उठकर घर को स्वच्छ किया जाता हैं और संध्या के समय गोबर के उपले और लकड़ी को प्रज्जवलित किया जाता हैं। घर की महिलाएं इस अग्नि के चारों ओर गाना गाते हुए नृत्य करती हैं और नई फसल के लिए मौसम के देवता के प्रति आभार व्यक्त करती है।

थाई पोंगल

पोंगल के दूसरा दिन को थाई पोंगल कहा जाता है। इस दिन लोग मिट्टी के एक बर्तन में हल्दी की गांठ , चाँवल और दूध भरकर घर के आंगन में सूर्य देवता के सामने उबालते है और इस बने हुए खाद्यान्न को सूर्यदेव को समर्पित करते है। इसके साथ गन्ना, नारियल और केले भी भेट किए जाते है। इस दिन लोग विशेष तौर पर भगवान सूर्य की उपासना करते है। थाई पोंगल के दिन चूना पाउडर से घरों के दरवाजों पर हाथों से परम्परागत कलाकारी की जाती है, इस कलाकारी को रंगोली या कोलम भी कहा जाता है।

मट्टू पोंगल

तीसरा दिन को मट्टू पोंगल कहा जाता है। मट्टू पोंगल गायों और बैलों को समर्पित रहता है। इस दिन इन मवेशियों को घंटी और फूलों के द्वारा सुसज्जित किया जाता है। क्योंकि इसी दिन भगवान भोलेनाथ ने अपने बैल बसव को श्राप देकर पृथ्वी पर सदा रहने के लिए कह दिया था। इस वजह से बैल फसलों की कटाई, और हल जोतने जैसे कार्य कर रहा हैं। मट्टू पोंगल के दिन जल्लीकट्टू का खेल भी दक्षिण भारत में खेला जाता है।

कान्नुम पोंगल

पोंगल के चौथे दिन को कान्नुम पोंगल कहा जाता है। कान्नुम पोंगल को कानू पोंगल भी कहा जाता है। कान्नुम पोंगल के दिन पकवानों को पान के पत्ते, गन्ने और सुपारी के साथ हल्दी के पत्तों पर सजाकर आंगन में रखा जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की चूना पत्थर, हल्दी तेल और चावल के साथ आरती उतारती है और उनके सुखी और समृद्ध जीवन की कामना करती है। उसके बाद सभी परिवारजन साथ में बैठ कर भोजन ग्रहण करते है।