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Coronavirus: सिर्फ मई महीने में हजारों बच्चे हुए संक्रमित, 95 फीसदी में नहीं थे कोई लक्षण

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Coronavirus: कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने कई घरों को बर्बाद करके रख दिया। बड़ी संख्या में जनहानि हुई और इस महामारी से बच्चे भी काफी प्रभावित हुए। देशभर में बच्चों पर इसका असर देखने को मिला, लेकिन हैरान कर देने वाली बात यह थी कि इन बच्चों में से ज्यादतर में संक्रमण के कोई लक्षण नहीं पाए गए। अब सिंगापुर में मिले कोरोना के नए वैरिएंट और तीसरी लहर में बच्चों के प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए बच्चों की सुरक्षा को लेकर देश फिक्रमंद हो रहा है।

तीसरी लहर में बच्चों की सुरक्षा की चिंता

कोरोना की दूसरी लहर के कहर को देखते हुए अब तीसरी लहर को लेकर चिंताएं बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि हमें तीसरी लहर से बच्चों को सुरक्षित करने के उपाय शुरू कर देना चाहिए। क्योंकि इस बात का अंदाजा लगाना मुश्किल है कि वायरस भविष्य में बच्चों को कितना संक्रमित करेगा। आईसीएमआर ने फरवरी 2021 की अपनी सीरो रिपोर्ट में बताया था कि 25.3 फ़ीसद बच्चों में वायरस के एंटीबॉडी मौजूद थे। यानी 25.3 फ़ीसद बच्चों को कोरोना संक्रमण हो चुका था।

60 फ़ीसद बच्चों पर मंडरा रहा है खतरा

नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेज के एक विशेषज्ञ के मुताबिक यदि पहली और दूसरी लहर के दौरान कोरोना संक्रमण के आंकड़ों और सीरो सर्वे के आंकड़ों को मिलाकर देखा जाए तो इस बात की पुष्टि की जा सकती है कि भारत में 40 फीसदी बच्चे कोरोना वायरस के संपर्क में आ चुके हैं। कुल मिलाकर अब 60 फ़ीसद बच्चों को कोरोना संक्रमण का खतरा हो सकता है। तीसरी लहर को लेकर अभी अनिश्चितता बनी हुई है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि तीसरी लहर बच्चों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती है।

देशभर में बच्चे हुए प्रभावित

धेशभर के आंकड़ों पुर गौर करें तो महाराष्ट्र के अहमदनगर में 9,928 नाबालिगों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। इनमें से 3,100 एक से 10 वर्ष तक के हैं और कुछ एक वर्ष से कम उम्र के भी हैं। हिसार में मई के 17 दिनों में 335 बच्चे संक्रमित हुए। राजस्थान के दो जिलों दौसा-सीकर में मई के दौरान केवल 22 दिनों में 300 से अधिक बच्चे संक्रमित हुए। कोरोना की पहली लहर में आरटी-पीसीआर जांच में चार फीसदी बच्चे संक्रमित पाए गए थे, लेकिन दूसरी लहर में ये संख्या 10 प्रतिशत तक पहुंच गई।