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Coronavirus: कैसे काम करता है रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट, जानिए इसके फायदे और नुकसान

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Coronavirus: कोरोना वायरस की दूसरी लहर का प्रकोप देश में हर तरफ हाहाकार मचा रहा है। बुखार और खांसी को हल्के में लेने की कीमत इंसान को जान देकर चुकाना पड़ रही है। ऐसे में बचाव का सबसे अच्छा तरीका यही है कि जैसे आपको कोरोना के लक्षण का थोड़ा भी अहसास हो, तुरंत नजदीक के सेंटर में जाकर अपनी कोविड-19 की जांच करवा ले। अब हम कोविड-19 के दूसरे टेस्ट रैपिड एंटीबॉडी की बात करते हैं। आइए जानते हैं, कैसे होता है यह टेस्ट और किस तरह से काम करता है।

वायरस से लड़ने के लिए शरीर में होता है एंटीबॉडी का निर्माण

रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट, जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है यह टेस्ट रैपिड है और शरीर के अंदर एंटीबॉडी का पता लगाता है। जिन व्यक्तियों को कोरोना वायरस का संक्रमण हो चुका है, उसके शरीर में वायरस से लड़ने के लिए इम्यून सिस्टम काम करता है। वायरस से लड़ने के लिए शरीर में एंटीबॉडी का निर्माण होने लगता हैं। सामान्यत: एंटीबॉडी संक्रमण के 5 से 6 दिन के बाद बनने लगते हैं और 6 से 8 सप्ताह तक बनते रहते हैं। कभी-कभी इससे ज्यादा समय भी लग सकता है। सामान्यतः दूसरे सप्ताह में एंटीबॉडी बनना शुरू हो जाते हैं और कई दिनों तक शरीर में बनते रहते हैं। इसी वजह से इस टेस्ट का महत्व संक्रमण के दूसरे सप्ताह में होता है।

30 मिनट में आ जाता है रिजल्ट

इस टेस्ट का रिजल्ट करीब 30 मिनट के अंदर आ जाता है, यही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है। लेकिन इस टेस्ट के फायदे के साथ कुछ नुकसान भी हैं। यदि कोई व्यक्ति कोरोना संक्रमित है और पहले सप्ताह में उसका रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट होता है तो उसकी रिपोर्ट निगेटिव होगी। यदि व्यक्ति कोरोना संक्रमित है या व्यक्ति जिसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है, उसमें हो सकता है कि कोरोना से संक्रमण होने के 4 से 6 सप्ताह के बाद भी मरीज का यह टेस्ट निगेटिव आए।

इसी तरह इस टेस्ट के फॉल्स पॉजिटिव होने की भी संभावना रहती है यानी कि हमारे शरीर के जो एंटीबॉडी हैं, वे कई बार क्रॉस रिएक्ट भी करते हैं यानी कि जो केमिकल एजेंट हैं, जो इस टेस्ट के लिए उपयोग करते हैं, वो दूसरी एंटीबॉडी के साथ रिएक्ट करके पॉजिटिव रिजल्ट्स भी देते हैं। मरीज को कोरोना का संक्रमण नहीं है फिर भी यह टेस्ट पॉजिटिव हो सकता है। इसी कारण से इस टेस्ट का उपयोग सामान्य तौर पर नहीं किया जाता है।