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Coronavirus: 14 फीसदी संक्रमितों को नई बीमारी देकर जा रहा है कोरोना, स्वस्थ होने के बावजूद दिक्कतें बरकरार

Coronavirus: रिसर्च में सार्स-कोव-2 वायरस से पीड़ित होने वाले 1,93,113 मरीजों की सेहत की जानकारी ली।

Coronavirus: कोरोना महामारी से दुनियाभर में लाखों लोग काल के गाल में समा गए और कई लोग अभी भी अस्पतालों में जिंदगी और मौत से संघर्ष कर रहे हैं। लाखों लोग इस बीमारी से रिकवर होकर स्वास्थ लाभ ले रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद कई कोरोना मरीजों को इस महामारी ने जिंदगीभर का शारीरिक दर्द दिया है। स्वस्थ हो चुके मरीज कई बीमारियों से ग्रसित हो चुके हैं।

रिसर्च में किया गया दावा

कोरोना से उबरने वाले कई मरीजों की दिक्कतें थमने का नाम नहीं ले रही है। ‘ब्रिटिश मेडिकल जर्नल’ में छपे एक रिसर्च में दावा किया गया है कि कोविड-19 संक्रमण विदा होते हुए भी कई स्वास्थ्य समस्याएं पीछे छोड़कर जा रहा है। 14 फीसदी मरीजों को किसी नई बीमारी के चलते दोबारा अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। लंदन स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ रिसर्च के रिसर्चर ने पिछले साल एक जनवरी से 31 अक्तूबर के बीच सार्स-कोव-2 वायरस से पीड़ित होने वाले 1,93,113 मरीजों की सेहत की जानकारी ली। इन सभी मरीजों की उम्र 18 से 65 साल के बीच थी। शोधकर्ताओं ने संक्रमण की पुष्टि के कम से कम 21 दिन बाद तक सभी प्रतिभागियों में पैदा होने वाली स्वास्थ्य जटिलताओं पर नजर रखी। साथ ही ‘नेशनल क्लेम्स डाटा’ का विश्लेषण कर इस बात की जानकारी ली कि वायरस को मात देने के छह महीने के अंदर कितने मरीजों को नई बीमारी का सामना करना पड़ा।

कोरोना के बाद हुई दूसरी बीमारियां

इस विश्लेषण में प्राप्त आंकड़ों की तुलना ऐसे मरीजों में स्वास्थ्य समस्याएं उभरने और उनके अस्पतालों में भर्ती होने की दर से की गई, जिन्हें कोविड-19 की समस्या नहीं हुई थी। रिसर्चर ने पाया कि सार्स-कोव-2 वायरस की चपेट में आने वाले 14 फीसदी मरीजों में कम से कम एक नई स्वास्थ्य समस्या जन्म लेती है, जिसकी वजह से उन्हें अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। स्वस्थ लोगों के मुकाबले कोविड-19 से निजात पाने वाले रोगियों के किसी नई बीमारी के कारण अस्पतालों में भर्ती होने की दर भी पांच फीसदी ज्यादा पाई गई है।

मुख्य रिसर्चर डॉक्टर इलेन मैक्सवेल ने बताया कि युवा मरीजों में कोविड-19 संक्रमण के साइडइफेक्ट के रूप में किसी नई बीमारी के होने का खतरा बुजुर्गों और बीमारों की तुलना में कहीं ज्यादा पाया गया है। इनमें कई ऐसे मरीज भी शामिल हैं, जिनका पहले किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझने का कोई इतिहास नहीं रहा है।