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क्‍लिनिकल ट्रायल के नतीजों में दावा, 5 से 11 साल के बच्चों के लिए सुरक्षित है फाइजर की वैक्सीन

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नई दिल्ली। फाइजर कंपनी ने कहा है कि क्‍लिनिकल ट्रायल रिजल्‍ट से पता चला है कि उसका कोरोना वैक्‍सीन पांच से 11 साल तक के बच्‍चों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है और इससे बच्‍चों में इम्‍युनिटी बढ़ी है। कंपनियों ने कहा कि वे जल्‍द ही वैक्‍सीन के लिए मंजूरी की मांग नियामक संस्‍था के समक्ष करेंगे। कंपनी की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि 12 वर्ष या इससे अधिक उम्र की तुलना में इस वैक्‍सीन की अपेक्षाकृत कम डोज बच्‍चों को दी जाएगी। कंपनी ने कहा है कि वे यूरोपीय यूनियन, अमेरिका और विश्‍व में अपना डाटा जल्‍द से जल्द नियामक संस्‍था के सामने पेश करेंगे।

ब्रिटेन में बच्चों में फैल रहा कोरोना

अमेरिका के बाद ब्रिटेन में स्कूल खुलते ही कोरोना के खतरे की घंटी भी बज गई। ब्रिटेन में 7 से 11 साल के हर 37 बच्चों में से एक बच्चा कोरोना संक्रमित मिल रहा है। एक सितंबर को अधिकांश स्कूल खुलने के बाद 11 सितंबर तक रेंडम जांच के दौरान 2.74% स्कूली बच्चे संक्रमित मिले। इंग्लैंड में आम लोगों की रेंडम जांच में 80 में से एक व्यक्ति पॉजिटिव पाया गया, सबसे ज्यादा संक्रमण का स्तर हर 45 में से एक स्कॉटलैंड में सामने आया है। स्कॉटलैंड की फर्स्ट मिनिस्टर निकोला स्टर्जन ने एंबुलेंस व्यवस्था के लिए सेना की मदद का आग्रह किया है। वहीं, इंग्लैंड के स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्कूलों को 3 लाख एयर मॉनिटर्स मुहैया कराए हैं। इनके जरिए क्लासरूम में हवा की क्वालिटी की निरंतर जांच की जाती है। प्रो. कैथरीन नोआकीस के अनुसार हवादार क्लासरूम से संक्रमण का खतरा 70% तक कम होता है।

यूके में नया यात्रा नियम

कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच ब्रिटेन में नए यात्रा नियमों में नया बदलाव किया गया है। पूरी तरह से वैक्‍सीनेटेड भारतीयों को यूनाइटेड किंगडम में टीकाकरण नहीं माना जाएगा और उन्हें 10 दिनों के क्वारंटाइन से गुजरना होगा। नए नियमों पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि कोविशील्ड को मूल रूप से यूके में विकसित किया गया था और पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट आॅफ इंडिया ने उस देश को भी आपूर्ति की है। इसे देखते हुए वहां की सरकार का यह फैसला बिल्कुल विचित्र है। इससे नस्लवाद की बू आती है। यूके की सरकार ने कहा है कि यदि किसी व्यक्ति को अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, भारत, तुर्की, जॉर्डन, थाईलैंड, रूस सहित अन्य देशों में टीका लगाया गया है, तो उन्हें गैर-टीकाकरण माना जाएगा। उन्हें क्वारंटाइन नियमों का पालन करना होगा।