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शहर ने नाम दिया ‘वंदे मातरम अंकल’, ऐसे करते हैं समाज की सेवा

समाजसेवी भूपेंद्र सिंह सिर्फ एक मैसेज पर मदद करने के लिए चल देते हैं।

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इंदौर। मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में कोरोना काल में कई लोगो को सामाजिक संस्थाओं द्वारा सामाजिक कार्य करते हुए देखा होगा, लेकिन शहर में एक शख्स ऐसे भी हैं, जो मोबाईल के एक मैसेज पर जरूरतमंद की मदद करने पहुंच जाते हैं।

वंदे मातरम अंकल के नाम से है मशहूर

71 साल के बुजुर्ग भूपेंद्र सिंह को शहर में वंदे मातरम अंकल के नाम से पहचाना जाता है। भूपेंद्र सिंह सिर्फ एक मैसेज मिलने पर मदद करने के लिए जरुरतमंद तक पहुंच जाते हैं। वह उस आदमी की मदद करने की हरसंभव कोशिश भी करते हैं। इस वजह से उनको लोग वंदे मातरम अंकल के नाम से पहचानते हैं। पीड़ित की समस्या सुनकर आर्थिक रूप से भी मदद की वो कोशिश करते हैं।

106 से अधिक लोगों को कर चुके हैं ब्लड डोनेट

गौरतलब है वंदे मातरम अंकल अभी तक तकरीबन 106 से अधिक लोगों को ब्लड डोनेट कर चुके हैं और समाज संस्थाओं के माध्यम से युवाओं को वंदे मातरम और मातृभूमि के लिए प्रोत्साहित करते हैं। वंदे मातरम अंकल उर्फ भूपेंद्र सिंह बचपन में ही बैतूल से अपने माता पिता के साथ इंदौर आ गए थे और यहां पर निजी संस्थानों में अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद फोटो ग्राफी के व्यवसाय से जुड़ गए और उसको ही अपनी कमाई का जरिया मानकर व्यवसाय के साथ समाज सेवा करने लगे।

युवा लेते हैं उनसे सलाह

उनके पास कई युवा अपने जीवन के लक्ष्य के लिए भी पहुंचते हैं और वंदे मातरम अंकल उन्हें अपने लक्ष्य प्राप्ति के लिए सही दिशा और निर्देश प्रदान करते हैं। वंदे मातरम अंकल सरकारीऔर निजी हॉस्पिटल में किसी पीड़ित को यदि ब्लड की आवश्यकता होती है तो वह अपना ब्लड देने पहुंचते हैं वंदेमातरम नाम इसलिए पड़ा क्योंकि वह सभी धर्म से ऊपर उठ कर देश प्रेम को मानते हैं इसीलिए करीबन 40 से 45 वर्षों से वह अन्य कोई भी बात बोलने से पहले व्यक्ति से वंदे मातरम बोल कर ही संबोधित करते हैं और इसी के चलते उनका नाम वंदे मातरम अंकल पड़ गया इसी नाम से उन्हें जाना जाने लगा है

वंदे मातरम अंकल को कई निजी संस्थाओं द्वारा अवार्ड से भी सम्मानित किया है तो वही फोटोग्राफी की दुनिया में उन्हें लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा गया है वंदे मातरम अंकल अपने पूरे परिवार के साथ भंवरकुआं क्षेत्र में रहते हैं।