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निकाय चुनाव पर बड़ा फैसला, नगरीय प्रशासन मंत्री ने कही यह बात

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भोपाल। मध्यप्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव की हलचल पर फिलहाल सरकार ने कुछ महीनों के लिए विराम लगाने का काम किया है। सरकार ने 6 महीने तक चुनाव नहीं कराने की बात की है। इसके पीछे कानूनी विषयों, कोरोना समेत फिर से प्रक्रिया दोहराने का हवाला दिया गया है। नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह ने निकाय चुनाव को लेकर कहा कि कानूनी विषयों और कोरोना के चलते राज्य में फिलहाल आगामी करीब छह महीने तक नगरीय निकायों के चुनाव होना मुश्किल है।

कोरोना को बताया वजह

राज्य निर्वाचन आयोग ने भी न्यायालय में कोरोना के कारण अभी चुनाव कराने में असमर्थता जताई है। नगरीय प्रशासन मंत्री ने कहा कि आरक्षण के विषय पर भी सुप्रीम कोर्ट का फैसला आना भी अभी बाकी है। साथ ही निकाय चुनाव कराने के लिए पूरी प्रक्रिया को दोहराना पड़ेगा। ओबीसी आरक्षण पर मंत्री भूपेंद्र सिंह ने कहा कि ओबीसी वर्ग को राज्य में 27 फीसदी आरक्षण दिलाने के लिए मध्यप्रदेश की सरकार हर संभव कदम उठा रही है। इसके लिए विधानसभा में एक स्टैंडिंग कमेटी भी बनाई जा रही है। इसके तथ्यों की मदद से हम इस आरक्षण के लिए एक बार फिर हाई कोर्ट में अपना पक्ष रखेंगे।

उन्होंने कहा कि भाजपा पूरी तरह इस आरक्षण के पक्ष में है, जबकि कांग्रेस इस मसले पर केवल राजनीति कर रही है। कांग्रेस मूल रूप से ओबीसी की विरोधी ही है। यदि 1955 में जवाहरलाल नेहरू ने जातिगत आधार पर जनगणना का काम न रोका होता तो इस तबके को तब ही आरक्षण का लाभ मिल सकता था।

इसलिए लगेगा छह माह का समय

भूपेंद्र सिंह ने कहा कि आरक्षण के विषय पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला बाकी है। वहीं, ग्वालियर हाईकोर्ट में आरक्षण को लेकर स्टे दिया हुआ है। इसके खिलाफ राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट गई है। अभी न तो सुप्रीम कोर्ट का कोई निर्णय आया है और न ही तय हुआ कि आरक्षण रोटेशन के आधार पर होगा या फिर पूर्व की तरह जनसंख्या के आधार पर होगा। यदि आरक्षण रोटेशन के आधार पर होता है, तो हमें पहले एक्ट बनाना पड़ेगा। फिर से आरक्षण प्रक्रिया नए सिरे से करना पड़ेगी। इसमें कम से कम 6 महीने का समय लगेगा।

347 नगरीय निकायों में होने हैं चुनाव

प्रदेश में कुल 407 नगरीय निकाय हैं। इनमें से 347 में आम निर्वाचन कराए जाना है। दो चरण में मतदान होगा। प्रथम चरण में 155 और दूसरे चरण में 192 नगरीय निकायों में मतदान कराया जाएगा। महापौर/अध्यक्ष का निर्वाचन अप्रत्यक्ष प्रणाली से होगा। इन 347 नगरीय निकायों में सभी 16 नगर निगम शामिल हैं। बता दें, अभी 60 नगरीय निकायों का कार्यकाल बाकी है।

निर्वाचन आयोग ने दिया था यह जवाब

मंगलवार को जबलपुर हाईकोर्ट में राज्य निर्वाचन आयोग ने बताया था कि सीमांकन, आरक्षण और महापौर का चुनाव प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष कराने को लेकर कई याचिकाएं हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। आयोग तीसरी लहर के आकलन और राज्य सरकार की सहमति के बाद ही चुनाव कराएगा। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस जवाब के साथ ही इस मामले में दायर की गई याचिका को निराकरण कर दिया था।