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अस्पताल ने किया मृत घोषित, परिजनों ने किया अंतिम संस्कार, 15 दिनों बाद जिंदा लौट आई महिला

75 साल की बुजुर्ग महिला मुत्याला गिरिजम्मा को अस्पतालों वालों ने मृत घोषित कर दिया था।

विजयवाड़ा: कोरोना ने लोगों की जिंदगी के मायने बदल कर रख दिए हैं। इसके नाम से ही लोगों में भय की लहर दौड़ने लगती है। अस्पतालों में बेड और ऑक्सीजन की कमी अब नहीं रही, लेकिन उस दौरान कुछ ऐसे भी वाकिए हुए जब लोगों को अजीब स्थितियों से गुजरना पड़ा। ऐसा ही एक वाकिया विजयवाड़ा में हुआ, जहां पर एक मृत महिला कुछ दिनों बाद अपने घर वापस आ गई।

कोरोना के संक्रमित थी

कोरोना ने लोगों को जिंदगी के कई दर्द दिए और ऐसी घटनाएं भी हुई जब लोगों को अजीब स्तिति से गुजरना पड़ा। कुछ ऐसी ही घटना एक परिवार के साथ हुई जब उसके मृत परिजन वापस घर लौट आए। मृत परिजन के वापस लौटने का मामला आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले का है, जहां पर 75 साल की बुजुर्ग महिला मुत्याला गिरिजम्मा को अस्पतालों वालों ने मृत घोषित कर दिया। परिवार वालों ने उनका अंतिम संस्कार भी कर दिया लेकिन इसके बावजूद भी गिरिजम्मा जिंदा अपने घर लौट आईं जिससे परिवार वाले भी हैरान रह गए।

अस्पताल ने दी थी मौत की सूचना

75 साल की मुत्याला गिरिजम्मा कोविड-19 की मरीज थीं और अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। अस्पताल वालों ने गिरिजम्मा के घरवालों यह सूचना दी कि उनकी मौत हो चुकी है। जिसके बाद परिवार वाले अस्पताल गए और मुर्दाघर से एक लाश को गिरिजम्मा का शव समझकर घर ले आए । बाद में शव का विधि-विधान से अंतिम संस्कार कर दिया गया, लेकिन 15 दिनों बाद ही जब गिरिजम्मा घर पहुंची तो सबके होश उड़ गए। गिरिजम्मा को कोरोना संक्रमित होने की वजह से 12 मई को विजयवाड़ा के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 15 मई को अधिकारियों ने बताया कि गिरिजम्मा की मौत हो गई है।

डेथ सर्टिफिकेट भी हुआ था जारी

गिरिजाम्मा के भतीजे नागू के मुताबिक अस्पताल के अधिकारियों ने परिवार को शवगृह में उनका शव तलाश करने को कहा। मेरे चाचा को मेरी चाची के जैसा ही एक शव मिला। अस्पताल के अधिकारियों ने एक डेथ सर्टिफिकेट भी जारी कर दिया था। परिवार वाले उस शव को जग्गैयापेट ले गए और उसी दिन अंतिम संस्कार कर आए। गिरिजाम्मा के बेटे रमेश की भी 23 मई को कोरोना से मृत्यु हो गई। हमने दोनों के लिए एक प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया था, लेकिन जैसे ही गिरिजम्मा का इलाज पूरा हुआ वह ठीक होकर अपने घर आ गईं। चूंकि घरवालों ने तो उन्हें मरा हुआ समझ लिया था इसलिए कोई भी वापस अस्तपताल नहीं गया लेकिन जैसे हीू गिरिजम्मा वापस आईं उनके परिवार वाले और पड़ोसी दोनों हैरान रह गए। नागू व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए पूछते हैं कि गिरिजम्मा को मरा हुआ बता दिया गया, इसमें किसी गलती थी?