मृदुभाषी डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने ईरान के साथ कथित तौर पर तेल व्यापार और समुद्री प्रतिबंधों से बचने में मदद करने के आरोप में भारत से जुड़े एक कारोबारी नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई की है। अमेरिकी वित्त विभाग ने भारतीय कारोबारी सुनील कुमार शर्मा, उनकी पत्नी जसप्रीत प्रीति शाहिद और उनसे जुड़ी नौ संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए हैं। इसके अलावा दो अन्य भारतीय नागरिकों को भी प्रतिबंधित सूची में शामिल किया गया है। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि इस नेटवर्क ने फर्जी समुद्री पंजीकरण और प्रमाणपत्रों के जरिए ईरान का तेल ले जाने वाले प्रतिबंधित जहाजों को अंतरराष्ट्रीय नियमों से बचने में मदद की।
अमेरिकी वित्त विभाग ने 4 नवंबर 2026 को इस कार्रवाई की घोषणा की। इसे ट्रंप प्रशासन के विशेष अभियान ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ का हिस्सा बताया गया है। इस अभियान का उद्देश्य ईरान के पेट्रोलियम निर्यात से होने वाली आय और उससे जुड़े आर्थिक नेटवर्क पर दबाव बनाना है।

कौन हैं प्रतिबंधों के दायरे में आए भारतीय कारोबारी और उनकी पत्नी?
अमेरिकी वित्त विभाग के अनुसार, इस कार्रवाई के केंद्र में चंडीगढ़ स्थित कारोबारी सुनील कुमार शर्मा और उनकी पत्नी जसप्रीत प्रीति शाहिद हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि दोनों ने मिलकर एक ऐसा नेटवर्क तैयार किया था, जो अलग-अलग देशों की समुद्री पंजीकरण एजेंसियों के नाम पर कथित तौर पर फर्जी सेवाएं संचालित करता था।
अमेरिकी जांच एजेंसी का दावा है कि इस नेटवर्क के माध्यम से ईरान से तेल ले जाने वाले प्रतिबंधित जहाजों को दूसरे देशों के झंडे और समुद्री प्रमाणपत्र उपलब्ध कराए जाते थे। इससे जहाजों की वास्तविक पहचान और उनके संचालन से जुड़ी जानकारियों को छिपाने में मदद मिलती थी।
अमेरिकी वित्त विभाग ने दो अन्य भारतीय नागरिकों अश्वनी कुमार धीमान और इशविंदर सिंह को भी प्रतिबंधित किया है। विभाग के मुताबिक, ये दोनों शर्मा से जुड़ी व्यावसायिक संस्थाओं में निदेशक के रूप में काम कर रहे थे। Forth+1
कैसे काम करता था कथित फर्जी समुद्री पंजीकरण का नेटवर्क?
अमेरिकी वित्त विभाग के आरोपों के मुताबिक, सुनील कुमार शर्मा और उनकी पत्नी ने विभिन्न देशों की समुद्री पंजीकरण एजेंसियों और जहाजों के वर्गीकरण से जुड़ी संस्थाओं के नाम पर वेबसाइटें और नेटवर्क तैयार किए थे।
इनके माध्यम से जहाजों के पंजीकरण, समुद्री झंडे, नाविकों के प्रमाणपत्र और जहाजों के वर्गीकरण जैसी सेवाएं देने का दावा किया जाता था। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि संबंधित देशों की सरकारों ने इन संस्थाओं को ऐसी सेवाएं देने की आधिकारिक अनुमति नहीं दी थी।
अमेरिकी विभाग ने आरोप लगाया है कि इस नेटवर्क ने गुयाना, अरूबा, माली, मोजाम्बिक, मलावी, सिंट मार्टेन और तिमोर-लेस्ते सहित कई देशों के नाम पर समुद्री पंजीकरण सेवाएं संचालित करने का दावा किया।
इस तरह तैयार किए गए दस्तावेजों का इस्तेमाल कथित तौर पर ईरानी तेल ले जाने वाले प्रतिबंधित जहाजों को अंतरराष्ट्रीय समुद्री प्रतिबंधों से बचाने के लिए किया गया। अमेरिकी वित्त विभाग के मुताबिक, इस नेटवर्क की गतिविधियां वर्ष 2014 से चल रही थीं। Forth+1
भारत से जुड़ी किन 9 संस्थाओं पर लगाया गया प्रतिबंध?
अमेरिकी वित्त विभाग ने सुनील कुमार शर्मा और उनकी पत्नी से जुड़ी नौ संस्थाओं को भी प्रतिबंधित किया है। इनमें भारत स्थित कंपनियों के साथ सिंगापुर में पंजीकृत एक संस्था भी शामिल है।
अमेरिकी विभाग की सूची में शामिल संस्थाओं के नाम इस प्रकार हैं:
- Eswatini Maritime Affairs and International Ship Registry PTE. Ltd.
- Oceaniek Technologies India
- Aryavart Ship Management Private Limited
- Precept Trends Private Limited
- Polynesia Maritime Private Limited
- Alexarya Finserv Private Limited
- Alexarya Media and Entertainment Private Limited
- Viharaboating Private Limited
- Aryavart Maritime and Educational Trust
अमेरिकी वित्त विभाग के अनुसार, इन संस्थाओं का इस्तेमाल कथित तौर पर फर्जी समुद्री पंजीकरण व्यवस्था और उससे जुड़े कारोबारी नेटवर्क को संचालित करने में किया गया था। Forth+1
ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट के तहत हुई कार्रवाई
अमेरिका ने इस कार्रवाई को ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ से जोड़ा है। इस अभियान के तहत अमेरिकी प्रशासन ईरान के तेल, पेट्रोकेमिकल और विमानन क्षेत्रों से जुड़े आर्थिक नेटवर्क पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई कर रहा है।
अमेरिकी वित्त विभाग का कहना है कि ईरान प्रतिबंधों से बचने के लिए अलग-अलग देशों के नेटवर्क, कंपनियों और समुद्री रास्तों का इस्तेमाल करता है। ऐसे नेटवर्क के जरिए तेल की बिक्री और उससे होने वाले भुगतान को जारी रखने की कोशिश की जाती है।
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि ईरान के शासन को किसी भी तरह की आर्थिक सहायता देने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। Forth+1
अमेरिकी प्रतिबंधों का कंपनियों और कारोबार पर क्या होगा असर?
अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद संबंधित व्यक्तियों और संस्थाओं की अमेरिका के अधिकार क्षेत्र में आने वाली संपत्तियों और वित्तीय हितों को फ्रीज किया जा सकता है। अमेरिकी नागरिकों और कंपनियों के लिए प्रतिबंधित व्यक्तियों या संस्थाओं के साथ अधिकांश व्यावसायिक लेनदेन प्रतिबंधित होंगे, जब तक कि इसके लिए विशेष अनुमति न हो।
इसके अलावा, अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन करने वाले लेनदेन में जानबूझकर सहायता देने वाले विदेशी व्यक्तियों और वित्तीय संस्थाओं को भी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
इसका असर अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग, समुद्री बीमा, शिपिंग और तेल व्यापार से जुड़े कारोबार पर पड़ सकता है। हालांकि, प्रतिबंधों का वास्तविक व्यावसायिक प्रभाव संबंधित कंपनियों के अंतरराष्ट्रीय कारोबारी संबंधों और लेनदेन पर निर्भर करेगा। Forth+1
तुर्किये की कंपनी पर भी अमेरिका ने की कार्रवाई
अमेरिकी वित्त विभाग ने इसी कार्रवाई के तहत तुर्किये स्थित फ्यूगो ग्राउंड सर्विसेज इंक (Fugo Ground Services Inc.) पर भी प्रतिबंध लगाया है।
अमेरिका का आरोप है कि यह कंपनी पहले से प्रतिबंधित ईरानी विमानन कंपनियों को ग्राउंड हैंडलिंग और अन्य सेवाएं उपलब्ध करा रही थी। इनमें ईरान एयर टूर, साहा एयरलाइंस, सेपेहरान एयरलाइंस, वारेश एयरलाइंस और अन्य कंपनियां शामिल हैं।
इससे स्पष्ट है कि अमेरिकी प्रशासन की कार्रवाई केवल भारतीय कारोबारी नेटवर्क तक सीमित नहीं है, बल्कि ईरान से जुड़े अंतरराष्ट्रीय आर्थिक और परिवहन नेटवर्क को भी निशाना बनाया जा रहा है। Forth+1
भारत-अमेरिका संबंधों के लिहाज से क्यों अहम है यह कार्रवाई?
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार, रक्षा, तकनीक और रणनीतिक सहयोग के कई महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। ऐसे में भारत से जुड़े कारोबारी नेटवर्क पर अमेरिकी प्रतिबंधों की कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय व्यापार और आर्थिक संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि अमेरिकी वित्त विभाग ने जिन व्यक्तियों और संस्थाओं पर कार्रवाई की है, उनके खिलाफ लगाए गए आरोप अमेरिकी प्रशासन के दावे हैं। इन आरोपों को न्यायिक रूप से सिद्ध अपराध के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।
फिलहाल इस कार्रवाई का सबसे बड़ा संदेश यह है कि ट्रंप प्रशासन ईरान के साथ जुड़े तेल और समुद्री व्यापार नेटवर्क पर दबाव बढ़ा रहा है। भारत से जुड़ी नौ संस्थाओं और कारोबारी परिवार को प्रतिबंधित सूची में शामिल करना इसी रणनीति का हिस्सा है।


