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अशोकनगर में स्थापित होगी 108 फुट ऊंची हनुमान प्रतिमा, अद्भुत विशेषताओं का होगा समावेश

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अशोकनगर: शहर के तुलसी सरोवर तालाब में स्थित टापू पर श्री हनुमान जी महाराज की भव्य प्रतिमा लगाई जाएगी। 108 फुट ऊंची विशाल प्रतिमा का निर्माण विख्यात मूर्तिकार प्रभात राय द्वारा किया जाएगा। मेटलऔर अन्य सामग्री को मिलाकर बनाई जाने वाली इस भव्य प्रतिमा के निर्माण में करीब दो करोड़ रुपए की लागत आएगी।

जन सहयोग से एकत्रित होगी राशि

मूर्ति के निर्माण में खर्च होने वाली राशि जन सहयोग से एकत्रित की जाएगी। स्थानीय विश्राम गृह में क्षेत्रीय विधायक जजपाल सिंह जज्जी सहित शहर के गणमान्य नागरिक, समाजसेवी, व्यापारी गणों की विधायक की अध्यक्षता में बैठक रखी गई। जिसमें प्रतिमा निर्माण और स्थान चयन को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान उपस्थित प्रबुद्ध जनों ने अपने अपने विचार रखे और बैठक के दौरान ही सहयोग राशि देने की घोषणा की।

8 माह में तैयार होगी प्रतिमा

तत्पश्चात ग्वालियर से आए मूर्तिकार प्रभात राय, सभी को साथ स्थल चयन के लिए शहर के प्रमुख स्थलों पर पहुंचे, जिनमें से तुलसी सरोवर तालाब के बीच स्थित टापू पर प्रतिमा स्थापित किए जाने का निर्णय लिया गया। मूर्तिकार प्रभात राय ने बताया कि प्रतिमा निर्माण में करीब 8 माह का समय लगेगा और मैटल सहित अन्य सामग्री से प्रतिमा का निर्माण किया जाएगा।

एक हाथ में गदा और दूसरे से देंगे आशीर्वाद

उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में श्री हनुमान जी महाराज की यह 108 फीट की पहली अद्भुत प्रतिमा होगी, जिसमें एक हाथ में गदा नीचे की ओर होगा और दूसरे हाथ से आशीर्वाद प्रदान करेंगे। इसके पूर्व कहीं भी इतनी ऊंचाई की प्रतिमा स्थापित नहीं की गई है। इससे शहर की एक अलग पहचान बनेगी। इस दौरान विधायक श्री जज्जी ने बताया कि हमारा शहर आस्थावान श्रद्धालुओं का शहर है और लंबे समय से शहर के श्रद्धालुओं की यह मंशा रही है कि यहां पर श्री हनुमान जी महाराज की विशाल प्रतिमा स्थापित की जाए और श्रद्धालुओं की इसी मंशा के चलते आज सभी को बुलाकर परामर्श किया गया।

सभी की सहमति से प्रतिमा स्थापित करने के लिए जगह का चयन किया गया साथ ही सभी के आर्थिक सहयोग इस प्रतिमा का निर्माण कराया जाएगा। मूर्तिकार प्रभात राय ने बताया कि श्री हनुमान जी की विशालकाय प्रतिमा के निर्माण में मेटल कोटेड फाइबर, रेजिन मेटल का चूरा मैट कैटीज एवं अन्य चीजों का उपयोग किया जाएगा। ऐसा प्रयास रहेगा कि इसकी भव्यता श्रद्धालुओं को देखते ही बनेगी प्रतिमा में अधिक मुस्कुराहट लाने से श्रद्धालु अधिक देर रुक कर प्रतिमा को निहारेंगे और अधिक देर रुकेंगे इसलिए अधिक मुस्कुराहट लाने का प्रयास नहीं किया जाएगा। भव्यता और आकर्षण पर ध्यान दिया जाएगा जिससे श्रद्धालु अपने आराध्य प्रभु के प्रेम पूर्वक दर्शन करेंगे।